बंटी और निम्मो की शादी..



पिछली गली में शोर मचा है
पूरा का पूरा मोहल्ला सज़ा है
रात आज की कुछ अलग लगती है
हर दीवार और खिड़की चमकती है

बच्चे सब गुब्बारो में गुल है
महके हुए आज सारे फूल है
भाभीया लेकर थाल खड़ी है
ख़ुशनुमा सबकी ये चाल बड़ी है

हम भी अचकन डाल के आ गये
नज़रे सबसे संभाल के आ गये
बंटी और निम्मो की शादी जो है
बस्ती की सारे कंगाल भी आ गये

रामलाल के कैफे में और
प्रेमियो वाले गार्डेन में
दोनो ने थी जो कसमे खाई
आज की रात वो पूरी होने आई

लड्डू,बर्फ़ी और गाज़र का हलवा
शीला, सुशीला की बेटियो का जलवा
नाच नाच के सब है मस्त,
मनसुख काका भी पीके पस्त.

सभी ख़ुशी से झूम रहे है
भिखारी भी मज़े से घूम रहे है
सब कुछ सही सलामत है
पर आने वाली एक आफ़त है

ये लो जी वो आ ही गयी
महफ़िल पे मुसीबत छा ही गयी
एक लड़की चिल्लाती हुई आती है
बंटी को अपना पति बताती है

जुते चप्पल और डंडो की बरसात
घूसे मुक्के और पड़ गयी लात
बंटी का बुरा हाल हो गया
पल में बेचारा फटे हाल हो गया..

उज़ड़ी शादी की रंगत,
टूटी खाने वालो की पंगत,
निम्मो कुछ भी समझ ना पाई
माहौल में बड़ी उदासी छाई

वीडियो वाले ने भी मौक़ा ना छोड़ा
क्लोज़ अप करके लिया बंटी का चेहरा
खींचा जो लड़की ने ज़ोर से
उतर गया फिर बंटी का सेहरा

इतने में वो लड़की चिल्लाई
ये किसको मैने लात जमाई
मुझको मेरे सुहाग की कसम
ये कबूतर नही है मेरा ख़सम

बंटी फिर से संभल चुका था
चल गया माहौल जो अभी रुका था
लोग सब खाने में लग गए
महफ़िल को फिर से ज़माने में लग गए

एक ही पल में हो गया सब बँटाधार
बंटी से भर गये न्यूज़ चैनल और अख़बार
इस पर बंटी ने बुरा ना माना
और सबको बताया घटना का विस्तार

आख़िर सब कुछ प्लानिंग से हुआ था
टी आर पी बढ़ गयी चैनल की और
बंटी का हुआ सपना साकार
बन गया वो भी टी वी स्टार..

17 comments:

अभिषेक ओझा June 17, 2008 12:12 PM  

चैनलों की तो नब्ज़ ही पकड़ ली आपने इस पोस्ट में ! पहले लगा की गुड्डे-गुड्डी के शादी की बात चल रही है पर धीरे-धीरे पता पड़ा की माजरा क्या है... न्यूज़ देखने पर भी तो ऐसा ही होता है आजकल... बस थोड़ा उल्टा होता है ... शुरुआत में लगता है की बहुत सनसनी खेज है और फिर अंत में गुड्डे-गुड्डी भी नहीं निकलते !

'ताइर' June 17, 2008 12:32 PM  

accha vaar kiya hai kushbhai...talvaar par vaar...khub hai...

रंजू ranju June 17, 2008 12:44 PM  

सही शब्द चित्रण खीचा है आपने इस रचना में मिडिया का ..:) यही सब होता है ख़ास कर इंडिया टीवी में :)

:meets_s June 17, 2008 12:55 PM  

लोग फेमस होने के लिए क्या क्या करते है !!!! शुक्र है आप अच्छी सी कविताए ही लिखते है सिर्फ़ :)

swati June 17, 2008 1:44 PM  

व्यंग्य भी अच्छा लिखते है आप....कमाल है

Saee_K June 17, 2008 2:18 PM  

achha chitrikaran kiya gaya hai..
aur nabz bhi pakdi gayi hai news ke business ki...

likhte rahe...

Gyandutt Pandey June 17, 2008 2:35 PM  

बहुत हुसिआर निकला बण्टिआ! हमारी तो सांस ऊपर नीचे कर दिये रहा!

DR.ANURAG June 17, 2008 2:42 PM  

बंटी भैया यहाँ भी आ गये......

mamta June 17, 2008 3:27 PM  

वाह ! क्या बात है।

टी.आर. पी .और टी .वी .स्टार क्या खूब खाका खींचा है आपने। :)

Piyush k Mishra June 17, 2008 3:43 PM  

"chain se sona hai to jaag jaao"

"Gaur se dekhiye is chehre ko..ye kahin aapke aas paas bhi ho sakta hai"

"Sai baba ki moorti bolne lagi"

bas yahi ho sagye hain aaj kal ke samachar.jab samachar dekhne chalo yahi sab aate rahte hain.samachaar milte hi nahin.
aur bumty se yaad aaya-Abhishek bachchan saab ki shaadi par bhi aisa hi kuch drama hua tha.koi jahnvi namak Sukanya pahunch gayee thi swayam ko abhishek ke gandharva vivah wali patni batati hui...aur saare news channels par par poore 24 ghante tak bas yahi samavhar..balki jahnvi ne to press conference bhi bula li (ya bulwa di gayee)...

sab paison ka khel hai.TRP banwate hain..jhoothi kahaniyon se sab.
bahut sateek vyangya hai kush

Udan Tashtari June 17, 2008 6:45 PM  

यहाँ भी टीआरपी बढ़ गई. सही खिंचाई है, जमाये रहिये.

Manish Kumar June 17, 2008 8:25 PM  

sahi vishay chuna hai aapn apni kavita ka. sabhi media ke is ravaiye se trast hain.

दिनेशराय द्विवेदी June 17, 2008 11:51 PM  

उस जमाने में जब अखबारों के पास समाचार का जरिया डाक, तार, टेलीफोन ही था। तो टेबुल न्यूज बनाई जाती थीं। वैसा ही कुछ माजरा है।

pallavi trivedi June 18, 2008 1:45 AM  

ha ha...bahut badhiya!banti se poochhna use kitne paise diye chaneel walo ne pitne ke liye.

Lavanyam - Antarman June 18, 2008 6:56 AM  

Great Satire on today's conditions ..keep writing good poetry & prose .
Regards,
L

Pragya June 18, 2008 10:46 AM  

hahaha bilkul sahi idea nikala hai TRP badhane ka!!!
achha hai aise hi shadiya hoti rahe / logo ke pet bharte rahe.... nahi shadi ke khane se nahi baba, TRP badhne ke hue promotion se!!
bahut sundar kavita!!

Abhijit June 18, 2008 11:29 AM  

ab channel itne hain aur sabko exclusive news chahiye...to woh bechare kya karein.Isiliye aajkal news bhi "manufacutring" industry me aa gaya hai.

badhiya vyang.

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कुश
जयपुर, राजस्थान, India
इक रोज़ अचानक कुछ शब्द जमी पर गिर पड़े.. मैने उठाकर उन्हे जेब में रख लिया और चलता रहा.. सोचा किसी ज़रूरतमंद को दे दूँगा. . और दिए भी पर देखिए ना जितने दिए बढ़ते ही गये.. अब भी बढ़ते जा रहे है.. जब भी जेब से कुछ निकालता हू ये शब्द भी साथ आ जाते है.. कभी ग़ज़ल बन जाते है कभी नज़्म कभी कविता और कभी ना जाने क्या.. मैं क्या कहु अपने बारे में.. ये शब्द कभी मिलकर कुछ कह दे तो यहा लिख दूँगा.. तब तक के लिए इतना जान लीजिए की मैं कुश हू...बस एक खूबसूरत ख्याल
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