
बादलो की जो आहट हुई.. मैने
सर उठाकर देखा.. वो
आ गयी.... इतने में एक
बूँद आँखो पर आ गिरी..
उसने कहा बारिश आने
वाली है.. मुझे जाना होगा
मैने जवाब नही दिया..
बस उसे देखता रहा
कुछ इस तरह जैसे आज से
पहले कभी देखा नही..
वो मेरे करीब आई और बोली
क्या हुआ बुद्धूराम.. बोलते
क्यो नही.. मेरे होंठ हिले
और सिर्फ़ इतना कह पाए..
आई लव यू... रूही के कोमल
फाहो जैसी मुस्कुराहट
फैल गयी उसके गालो पे..
अपनी पलको को झुकाकर बोली
आई लव यू 2.. और पलट गयी
मैने पूछा दो कौन?
उसने जवाब नही दिया और
जाने लगी.. मैने चिल्ला कर
पूछा सोना बताओ ना दो कौन ?
उसने जाते हुए पीछे मूड
कर देखा मुस्कुराई और सिर्फ़ इतना बोली..
एक तुम और दूसरे भी तुम..
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dil kholkar rakhna..aasan nahi hota..par aapne itni sachhai se likha hai..ke ham maan gaye ki ye aap ke 'unke' liye hai..padhte hue
ReplyDeletehamare bhi chehre pe muskurahat aayi :-)
likhte rahe..
:) .... good one...
ReplyDeleteतुम ओर सिर्फ़ तुम.......इस प्यार की भी अलग ही बारिश होती है ना?
ReplyDeleteअच्छा लिखा... :)
ReplyDelete:) प्यार की बहुत मासूम कविता ...अच्छी लगी :)
ReplyDeleteबहुत बढ़िया...
ReplyDeleteकुश जी
ReplyDeleteकम से कम टिप्पणी के लिए शब्द तो छोड़ देने थे न!
आपका यह खयाल बड़ा खूबसूरत लगा.....
ReplyDeleteशोख मासूमियत...
ReplyDeleteआपके 'उनको' हमारा सलाम.. सिर्फ़ कोरी कल्पना हो तो भी :-)
kya baat hai...hakeekat ko kavita mein dhaala jaye to sundar hi hoti hai.
ReplyDeleteसही है, लिखते रहिये. :)
ReplyDeleteआप सभी की स्नेहिल प्रतिक्रियाओ के लिए धन्यवाद.. एक और बात जैसा की मेरे ब्लॉगर मित्रो ने मुझसे फरमाया है.. मैं उन्हे बताना चाहता हू की ये घटना पूर्ण रूप से काल्पनिक है.. वैसे इस पे मेरी खूब टाँग खींची गयी है सबसे.. आशा है आप सभी का प्यार यूही मिलता रहेगा.. आप ही का ब्लॉग है आते रहिए.. वो हमारी मारवाड़ी में कहते है 'पधारो सा'..
ReplyDeleteso sweet feeling,pyari si baatein bahut badhai
ReplyDeleteजिंदगी भी कल्पनाओं के सहारे ही आगे बढ़ती है मेरे दोस्त.
ReplyDeleteबहुत सुंदर.
बधाई.
वैसे २ का कोई और मतलब तो नहीं था ना?
:) :)
bahut badhiya!!!!! :)
ReplyDeleteek khubsurat bayan-e-mulaqat....man ko romani kar diya...
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