स्वागत है सभी आगंतुको का शब्दो की इस फुलवारी में, कई सारे रंग बिरंगे फूल मिलेंगे यहा पर आपको जैसे मन को भाए वैसे रख लीजिए, चाहे तो बालो में लगा लीजिए, या फिर किसी को तोहफे में दे दीजिए कोट की जेब में रख लीजिए, या हाथो में लेकर प्यार का इज़हार करने चलिए, जो मर्ज़ी आए कर लिजिये..........फूलो की इस फुलवारी में, .....स्वागत है सभी आगंतुको का शब्दो की इस फुलवारी में..

Sunday, April 27, 2008

उछालता कोई मुझे तो..



उछालता कोई मुझे तो
खिलखिला देती...
मुस्कुराता कोई तो
पलकें हिला देती..

पूछता कोई जो कुछ
जवाब आँखें हिला कर देती..
गोद मैं उठाता कोई तो
उसे गीला कर देती..

डाँटता कोई मुझे तो
झटमूट् रोती..
आती जब नींद तो
माँ की गोद में सोती..

मम्मी की पहन साड़ी
श्रींगार मैं करती..
आ जाए ना कोई कमरे में
इस बात से डरती...

दादा को पकड़ कर
घोड़ा मैं बनाती..
ज़्यादा तो नही पर
खाना, थोड़ा मैं बनाती..

होती जब बरसात
ख़ूब मैं नहाती..
काग़ज़ की कश्तिया
पानी में बहाती..

फिर बड़ी हो जाती और
झूलती झूलो पे..
बन जाती तितली कोई और
घूमती फूलो पे...

सोमवार की पूजा के
फूल मैं चुनती..
आएगा कोई जो
उसके ख्वाब मैं बुनती..

ले जाता मुझे कोई
डोली में बिठाकर..
पल्को की छाओ में
आँखो में लिटाकार...

अपना फिर छोटा सा
परिवार मैं बनाती..
खशियो से सज़ा सा
संसार बसाती..

बाँट प्यार सभी को
सबके दर्द मैं लेती..
गर माँ तेरी कोख से
जन्म मैं लेती....

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22 comments:

अल्पना वर्मा said...

अच्छी प्रस्तुति.
अन्तिम पंक्तियाँ कविता का सारा सार समेटे हुए हैं.
विषय नया नहीं मगर चिंतन जारी रखना ही होगा जब तक 'भ्रूण हत्या जैसी समस्या सुलझती नहीं है.
कविता जागरूकता लाने का माध्यम है.आप की कविता इस ओर एक अच्छा प्रयास है.बधाई.

Parul said...

वाह! जियो--

mehek said...

बाँट प्यार सभी को
सबके दर्द मैं लेती..
गर माँ तेरी कोख से
जन्म मैं लेती....
sach satya hai,kash wo janam leti ya koi lene deta,kash uske sapne bhi sach hobahut gehre bhav se bhari kavita,sahi hai jab tak bhrun hatya na ruke ,mashal jalakar hi rakhni hogi.bahut badhai.

राजीव रंजन प्रसाद said...

आरंभ से ही संवेदित करती कविता अंत में पलकें नम कर देती है..बेहद मर्मस्पर्शी।

*** राजीव रंजन प्रसाद

अभिषेक ओझा said...

बहुत अच्छी कविता... शुरुआत में जितनी मनोहर थी बाद में उतनी ही संवेदनशील.. !

mamta said...

आपकी आज की कविता बिल्कुल आपके नाम के अनुरूप है एक बहुत ही खूबसूरत कविता।

Abhijit said...

ek gahan samajik samasya par bahut asardar kathan...kavi apne samaj ka aaina hota hai, is kathan ka satya aisi kavitaon ko padhne se pata chalta hai

TAEER said...

bahot hi pyari kavita...ek sandesh ke saath...

rakhshanda said...

बहुत सुंदर,लेकिन एक गहरे दर्द में लिपटी हुयी,

DR.ANURAG ARYA said...

होती जब बरसात
ख़ूब मैं नहाती..
काग़ज़ की कश्तिया
पानी में बहाती..

फिर बड़ी हो जाती और
झूलती झूलो पे..
बन जाती तितली कोई और
घूमती फूलो पे...


मेरा सपना है एक नन्ही सी परी का ....पता नही पुरा होगा या नही पर ये कविता कही गहरे तक उतर गई......

Udan Tashtari said...

वाह!! बहुत उम्दा!

Lavanyam - Antarman said...

बहुत मुकम्मिल सोच से लिखते हैँ आप ...
लिखते रहीये यूँ ही ...
स्नेह्,
- लावण्या

pallavi trivedi said...

कुश....शब्द नहीं हैं इस कविता के लिए! बहुत गहरे तक छू गयी!

Saee_K said...

बाँट प्यार सभी को
सबके दर्द मैं लेती..
गर माँ तेरी कोख से
जन्म मैं लेती....

sach ko bhi khoobsoorati se darshaya gaya hai, love to see you progressing as a poet..

likhte rahe..

रंजू said...

अपना फिर छोटा सा
परिवार मैं बनाती..
खशियो से सज़ा सा
संसार बसाती..

बाँट प्यार सभी को
सबके दर्द मैं लेती..
गर माँ तेरी कोख से
जन्म मैं लेती....

दिल को छु लेने वाले भाव पूर्ण संवेदन शील रचना है जी बहुत कुछ कह गई है

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

आप सभी की स्नेहिल प्रतिक्रियाओ का धन्यवाद.. आपके शब्द मेरे सर आँखो पर...

Poonam Agrawal said...

gar maa teri kokh se janam main leti....
Khubsurst soch ke liye aap badhai ke patra hai..
isi soch ko maine bhee shabdon mein piroyaa hai...
(gar ahvahan karun chand kaa)
Padiyega jaroor...

Neelima G said...

Hii, read ur blog for the first time. Its good. Keep it up n do keep reading whtever nonsense i write on my blog also.

Neelima

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

पूनम जी और नीलिमा जी..
बहुत बहुत धन्यवाद आपकी प्रतिक्रियाओ के लिए..

rohitler said...

क्या बात है!

आखरी 4 लाइनों में गुलज़ार साहब का टच है.....
बेहद खूबसूरत

apurn said...

aaj pahli baar main aap ka blog dekh raha hoon aur pahli he kavita ne dil ko chhoo liya
bahut bahut aur bahut he sunder

सागर नाहर said...

दिल को छू लेने वाली पंक्तिया.. बहुत अच्छी लगी यह कविता।