Tuesday, July 13, 2010

अ गर्ल एट क्वींस रोड़...

"अबे तुझे क्या पता... बाईक के पीछे लड़की बिठायी क्या तुने कभी,...? बार बार ब्रेक लगाने में जो मज़ा आता है वो तू क्या समझेगा प्यारे.. " आईने के सामने कंघी करते हुए वो बोला..

"तू तो साले कमीना का कमीना ही रहेगा.." उसका दोस्त हँसते हुए बोला.. "पर ये लडकिया रोज़ रोज़ कैसे मिल जाती है तुझे.. ?"

"अरे प्यारे ढूँढने से तो खुदा भी मिल जाता है.. वो क्वींस रोड पे फैक्ट्री है ना कपड़ो की.. वहां काम करने वाली लडकिया अक्सर रात को लिफ्ट ले ही लेती है.. बस अपना काम बन जाता है.. चल मैं निकलता हु ऑफिस के लिए आज की स्टोरी रात को आकर बताऊंगा.. "

"बाय!"
"बाय!"
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कहानी का मुख्य पात्र आज ऑफिस में देर तक रुका था.. घडी साढे दस बजा चुकी थी और वो सोच रहा था कि कही आज सारी लडकिया निकल नहीं जाए.. इतने में बॉस ने आकर उससे जाने के लिए कहा.. वो फ़ौरन हेलमेट उठाया और तेज़ कदमो से सीढिया उतर कर पार्किंग की ओर चला गया.. उसे जल्दी थी.. वैसे तो उसके ऑफिस से क्वींस रोड की दूरी करीब पांच दस मिनट थी पर वो और जल्दी जाना चाहता था.. फैक्ट्री के सामने वाले बस स्टैंड को खाली देखकर वो मायूस हो चुका था.. उसने रुक कर चारो तरफ नज़र दौडाई पर कोई लड़की नज़र नहीं आयी.. वो किक मारकर आगे बढ़ने लगा.. इतने में उसकी नज़र रोड लाईट के सहारे खडी लड़की पर पड़ी.. उसकी आँखों में एक चमक आ गयी.. वो बिना समय गवाए उस लड़की तक पहुंचा..

सफ़ेद सलवार कमीज और लाल दुपट्टा पहने खडी वो लड़की देखने में बहुत सुन्दर थी.. आँखों में गहरा काजल और माथे पर बड़ी लाल बिंदी.. कानो में बड़ी बड़ी बालिया और दोनों हाथो में एक दर्जन से भी ज्यादा चुडिया.. ऐसी लड़की उसने यहाँ पहले कभी नहीं देखी थी.. वो उसे देखता ही रह गया.. "हेल्लो" वो लड़की बोली.. सकपकाकर उसने बोला "जी..? इतनी रात गए यहाँ क्या कर रही है आप..?"

"मुझे लिंक रोड जाना है.. बहुत देर से वेट कर रही हूँ.. ना कोई बस मिल रही है ना ऑटो.. फिर रात भी काफी हो रही है.. "

"नो प्रोब्लम बैठो मैं छोड़ देता हूँ.. "
"लेकिन रात काफी हो गयी है और... "
"अरे डरिये मत मैं कुछ नहीं करूँगा.. वैसे भी मुझे लिंक रोड ही जाना है वहां से अपनी सिस्टर को लेकर घर जाऊँगा मैं.. "
"नहीं वो बात नहीं है.. पर "
"अरे मैडम आप यकीन करिए.. कुछ नहीं होगा वैसे भी यहाँ अकेले खड़े रहने में खतरा ज्यादा है.. और इस इलाके में सिर्फ फेक्ट्रिया है ज्यादा ट्रैफिक रहता नहीं है पता नहीं आपको ऑटो मिले ना मिले.. "

लड़की ने थोडा सोचकर हाँ कर दी.. वो मन ही मन खुश हो गया.. और जानबूझकर वो थोडा पीछे बैठ गया सीट पर जगह काफी कम बची थी.. लड़की सहमी हुई सी बैठ गयी.. अब वो मन ही मन खुश था.. गाडी बिलकुल धीरे धीरे चला रहा था.. साथ साथ लडकियों के रात को अकेले ना घूमने पर लेक्चर भी सुना रहा था.. वो लड़की चुपचाप बैठी सुन रही थी.. इस रस्ते को वो अच्छी तरह जानता था.. उसे पता था आगे स्पीड ब्रेकर आने वाला है.. उसने बाईक की रफ़्तार थोडी बढा दी... और स्पीड ब्रेकर के बिलकुल नजदीक जाकर जोर से ब्रेक लगाया.. अचानक झटका लगा.. लड़की का हाथ उसके कंधे पर आ गया.. वो रोमांचित हो उठा..

"आप ठीक तो है ना..! वो दरअसल स्पीड ब्रेकर नज़र नहीं आया था.. " वो बोला
"कोई बात नहीं.." लड़की धीरे से बोली..

उसने फिर से बाईक की रफ़्तार बढा ली थी.. और अपनी बाईक का रियर मिरर इस तरह से सेट करने लगा कि जिसमे पीछे बैठी लड़की का चेहरा साफ़ नज़र आये.. उसने देखा लड़की के चेहरे पर मुस्कान थी.. वो खुश हो गया. एक गढ्ढे के पास फिर से उसने ब्रेक लगाया.. और मिरर में देखा लड़की मुस्कुरा रही थी.. अब तो उसके मन की मुराद पुरी हो गयी थी.. वो पुरे रास्ते ब्रेक लगाता और मिरर में लड़की को मुस्कुराते हुए देखता.. मिरर में मुस्कुराता हुआ चेहरा देखकर वो खुश होता जा रहा था.. इतने में लड़की बोली..

"बस यही रोंक दीजिये.. "
"लेकिन लिंक रोड तो वो सामने की तरफ है.. "
"नहीं बस मुझे यही तक आना था वो पिछली गली में मेरा घर है मैं चली जाउंगी "
"तो मैं आपको घर तक छोड़ देता हूँ.. "
"नहीं नहीं उसकी कोई जरुरत नहीं.. आपने मेरी इतनी हेल्प की इसके लिए थैंक्स "
"अरे इसमें थैंक्स की क्या बात है... "
"अच्छा तो मैं चलती हु.. " और वो पलटकर जाने लगी..

"ज़रा सुनिए.. " वो बोला....... "आप फिर कब मिलेगी वहा..  "
"मिल जाउंगी.. चिंता मत करिए इतनी आसानी से आपका पीछा नहीं छोडूंगी.." वो हँसते हुए बोली..
"हाहाहा.. ज़रूर..!" वो भी हंस दिया और बाईक को स्टार्ट करके वापस जाने लगा..

रास्ते भर वो बार बार उस लड़की को याद कर रहा था.. कैसे ब्रेक लगते ही वो लड़की उससे चिपक सी जाती थी.. और जब उसने कंधे पर हाथ रखा था एक सरसराहट फ़ैल गयी थी जिस्म में.. इतनी खूबसूरत लड़की उसे पहले कभी नहीं मिली थी.. यही सोचते सोचते उसकी नज़र रियर मिरर पर पड़ी.. उसने देखा वही लड़की उसमे मुस्कुरा रही थी.. उसने अचानक ब्रेक लगाये.. पीछे देखा तो कोई नहीं था.. उसने मिरर में देखा तो वो लड़की नहीं थी.. वो मुस्कुराया.. ज़रूर कोई वहम होगा..

उसने गाडी स्टार्ट की थोडा आगे ही बढा था कि उसे फिर से आईने में वो नज़र आयी.. ठीक वैसे ही मुस्कुराते हुए.. उसने घबराकर गाडी रोकी और गौर से देखा तो वो लड़की नहीं थी.. उसने अपनी पीछे की सीट पर हाथ फिराकर देखा कुछ भी नहीं था.. सुनसान सड़क पर वो अकेला खड़ा था.. अब वो घबरा रहा था.. उसने बाईक स्टार्ट की और चलने लगा.. थोडी दूरी पर जाके उसने जैसे ही मिरर में देखा.. वो लड़की मुस्कुरा रही थी.. 

अब तो वो बुरी तरह से डर गया था.. वो समझ नहीं पाया ये क्या हो रहा है.. उसने बाईक को वापस उलटी तरफ घुमाया.. और तेज़ी से उसी तरफ चल पड़ा.. जहाँ से वो आया था.. पुरे रास्ते भर उसे मिरर में वो लड़की मुस्कुराते हुए नज़र आ रही थी.. उसकी आँखों से लगातार आंसु बह रहे थे.. वो घबरा चुका था... थोडी ही देर में वो फिर से क्वींस रोड पर आ चुका था.. उसकी साँसे बढ़ी हुई थी.. उसने वहा आकर जैसे ही गाडी रोकी उसका कलेजा काँप उठा.. उसका शरीर सुन्न हो गया..पूरा बदन पसीने में भीग उठा.. उसकी आँखों से खून बहने लगा.. और वो भक्क से जमीन पर गिर पड़ा... जिस लड़की को वो लिंक रोड पर छोड़ आया था वो अभी सड़क के दूसरी तरफ उसी रोड लाईट के सहारे खडी थी जहाँ से उसने लिफ्ट दी थी...

Monday, June 7, 2010

बादल ऑन ड्यूटी हो.. और चाय की तलब..!

बादल ऑन ड्यूटी हो.. और चाय की तलब..!  ऊपरवाले क्या खालिस ज़िंदगी दी है तूने....!  इस से बढ़िया कॉम्बिनेशन तो हो ही नही सकता..  झमाझम बारिश में नहाना किसी एक्स्ट्रा केरिकुलर एक्टिविटी की तरह हर ऑफीस मे होना चाहिए.. वरना सीट पे बैठे बैठे ठंडे मौसम में जो गर्म आहें निकलती है की  सी भी तड़प कर चार गाली दे मारता है..

वैसे इधर मौसम दो चार दिनों से अच्छा है.. ठंडी हवा चल रही है.. देखते है इंदर बाबू कब तक मेहरबान रहते है. प्लास्टिक की थैलिया जेब में रख कर घूम लो बॉ... मोबाइल और पर्स गीले नही हो जाए.. एंड डोंट माइंड थैलिया प्लीज़..! प्लास्टिक कैरी बैग्स भी बोल सकता था..  पर उस से मेरी भारतीयता को ठेस पहुचती और मैं तो ठहरा पक्का देसी.. वैसे बारिश की बात करे तो किसी ने ठीक ही कहा है.. हर बारिश की अपनी अलग कहानी है..


ड्रीम : ऑफिस की खिड़की से बाहर हवा में छलांग लगाके भीगना.. और कंप्यूटर को नाव की तरह पानी में बहा देना..
फैक्ट : ऑफिस की खिड़की से बाहर गिरती हुई बूंदों को देखना.. और फिर दिल पर चट्टानें रखकर कंप्यूटर की स्क्रीन में नज़रे गड़ा लेना..
 












ये गिरी एक और बूँद खिड़की पे..
रात
नौ से बारह राजनीति देखने का प्रोग्राम है ..अभी के लिए टाटा रहेगा..

Wednesday, April 7, 2010

लव स्टोरी... विद आउट लव!

लव के बिना भी कोई लव स्टोरी होती है..?  अजी होती है.. अधिकतर स्टोरियों में से लव लापता ही होता है.. मगर वो ऐसी कोई कहानी नहीं थी इसमें लव था पूरा पूरा..  वन हंड्रेड परसेंट.. इंग्लिश में कहो तो सौ प्रतिशत..

लेकिन थी वही घिसीपिटी लव स्टोरी.. जिसमे ना हिरोइन का बाप
गुंडा था ना उसकी माँ बीमार थी.. ना भाई आवारा था औरना ही हीरो बेरोज़गार..  दोनो तो मिले भी नही थे कभी...  फिर ऐसा क्या था जिसके लिए राईटर मजबूर हो गया इसे लव स्टोरी कहने  के लिएकही उसे किसी ने मजबूर तो नही किया ? और मजबूर किया भी हो तो हमे क्याहम चलते है कहानी की तरफ.. दोनो में प्यार  तो था नहीं और ना ही दोनो मिले थे कभी.. मग लव ? लव को कौन रोक सका है..? वो तो साला हवाओ में बहता है.. आसमानो में उडता है.. किसी लाल बत्ती पे रुकता थोड़े ही है.. कम्बख़्त हो ही जाता है..  तो हो ही गया..

इधर लव हुआ उधर पूरी बोतल खलास.. नहीं नहीं खांसी की दवाई थी बोतल में.. हीरो की पड़ोसन को खांसी जो थी.. बेटे तो विदेश चले गए थे.. अकेली पड़ी रहती थी.. सुबह शाम दवाई लेती थी बेचारी.. क्या कहा ? हीरो की पड़ोसन से हमें क्या मतलब? तो छोडिये.. जाने दिजिये.. गोली मारिये पड़ोसन को.. मास्टर की बात करते है.. मास्टर बड़े ही मास्टर आदमी थे.. कपडे सिलते थे.. फीता हाथ में लेकर लोगो को नापते थे.. नाप रहे थे एक दिन हिरोइन को... फीते से तो नाप लिया ही था आँखों से भी नाप लिए... हिरोइन जानती थी ये लव नहीं है कुछ और है.. हिरोइन को युही हिरोइन नहीं कहते.. नज़र है उसके पास.. नजरो को परखने की..

देखा..! नजरो के फेर में कहानी को नज़र लग गयी... तो हम कह रहे थे कि लव था नहीं.. अजी होता कैसे..? बचपन से हीरो बाप की लातो और मोहल्ले की लडकियों से जो कुत्ते की तरह पीटा था.. कि लव नाम का लफाडू ही भूल बैठा...फिर लवस्टोरी के हीरो को लव ही नहीं पता तो गुरु लवस्टोरी कैसी? बस यही सोच के पंडित जी को फैक्स भेजा.. तुरंत आइये..!

पंडित जी कौनसे अमरीका के राष्ट्रपति थे.. तुरंत आ गए.. पर ये क्या? फैक्स किसको भेजा था और कौन आ गया.. ये तो दुसरे पंडित जी थे..खैर अब जो आये सो अच्छा.. पंडित तो पंडित होता है.. ज्यादा से ज्यादा चोटी लम्बी या छोटी होती होगी... होती होगी से ये मतलब नहीं कि राईटर को पता नहीं कि है या नहीं.. बस वो बचना चाहता है.. उन लोगो से जो बगल में राम और बगल में ही छुरी दबा के बैठे है.. पर राईटर ही अगर डर जाएगा तो लव स्टोरी आगे कैसे बढ़ेगी..? क्या कहा वैसे भी कौनसी आगे बढ़ रही है..?

माफ़ कीजियेगा जनाब...! भावो में भटक गए थे इधर उधर.. अब भटकते है कुछ लोग भावो में भी भटकते है.. क्या कहा लापतागंज के
डायलोग मार रहे है.. ? अब मारते है जी.. कुछ लोग डायलोग भी मारते है.. क्या कहा.. आप नहीं मारते?... अब कुछ लोग नहीं भी मारते है..   फिर भटक गए,,, इधर उधर की लल्लो चप्पो में असली बात गच्चा खा गयी.. असली बात थी क्या वैसे? अरे नहीं गुरु गुस्सा मत होइए.. हमें पता है हम तो ये चेक कर रहे थे कि आप तो नहीं भटके.. शुक्र है आप यही हो.. लव स्टोरी के लिए पाठक का होना बहुत ज़रूरी है.. और लव का भी..

तो लव का हम कुछ यु कह रहे थे.. कि हीरो पहली बार जब हिरोइन की गली से गुजरा तो हिरोइन अपनी नानी के यहाँ
ऋषिकेश गयी हुई थी..वरना तो दोनों मिल ही जाते.. खैर जिस दिन हिरोइन की ट्रेन वापस स्टेशन  पर आने वाली थी उसी दिन हीरो की भी ट्रेन थी शिमला की... पर दोनों की ट्रेन में साढे आठ घंटे का फर्क था.. सो नहीं मिले..

अब नहीं मिले तो नहीं मिले.. हम क्यों अपना खून जलाये.. क्या कहा.. जलाएंगे ? तो ठीक है जलाइए. आप पाठक है कुछ भी जला सकते है.. आपकी बात तो माननी ही पड़ेगी..  तो बात कुछ ऐसी है..कि उस शाम लव स्टोरी की हिरोईन बहुत कन्फ्यूज थी.. बैठे बैठे सोच रही थी कि लव स्टोरी में वो क्यों झक मार रही है.. तभी राईटर ने उसका एक प्रेमी पैदा कर दिया.. अरे नहीं नहीं महाशय.. अभी के अभी थोड़े ही पैदा किया है. वो तो लव स्टोरी में अभी आया है.... क्या कहा.. जबरदस्ती घुसाया है..?  साहब अब आप हद पार कर रहे है.. पाठक की औकात में रहिये.. राईटर की कहानी है जो मर्जी आये करे.. आप क्यों कहानी के पजामे में हाथ घुसा रहे है..

क्या कहा.. इस से अच्छा है कहानी ख़त्म कर दे... ? लीजिये फिर.. तो अंत कुछ ऐसा हुआ कि.. हिरोईन को एक प्रेमी मिल गया.. दोनों ने शादी कर ली...हीरो अब चालीस पार कर चुका है..  अजी बिलकुल शादी शुदा है.. पिताजी के कहने पर शादी कर ली थी साढे तीन बच्चे भी है.. अजी एक अभी अन्दर ही है ना.. क्या कहा हीरो की बीवी प्रेग्नेंट है ? अजी नहीं अभी तो हीरो के अन्दर है.. वो भी आएगा.. थोडा सब्र रखिये.. एक तो आप उतावले बहुत जल्दी हो जाते है..

तो मैं कहा था..?
हाँ शादी... ! तो दोनों ने शादी कर ली.. पर हिरोईन का प्रेमी साला निकम्मा निकला..और हीरो की पत्नी? अजी हीरो की पत्नी हीरो के घर कम रहती है और अपने मायके ज्यादा.. और लव..? यही पूछ रहे है ना आप.. तो यार एक तो आप लोग सवाल बहुत करते हो.. राईटर बेचारा क्या क्या लिखे.. उसकी खुद की लाईफ तो लव स्टोरी विद आउट लव है.. परेशान होंकर उसने अज्ञातवास ले लिया.. और लव स्टोरी की वाट लग गयी.. बस खुश! 




आफ्टर अ लॉन्ग लॉन्ग टाईम-
राईटर जो है.. वो अभी तक लव ढूंढ रहा है.. आपको कही मिले तो बता देना प्लीज.. इट्स अ हम्बल रिक्वेस्ट!  

Monday, March 29, 2010

खट्टी मिश्री जैसी लाईफ...


हवा और तेज़ हो रही है.. पन्ने उड़ाने की चाल है.. मैंने पेपरवेट रख दिया है..
तुम्हारे ख्याल कीमती है मेरे लिए.. मैं इन्हें वेस्ट नहीं जाने दूंगा..
बड़ी मुश्किल से मिलती है हंसी तुम्हारी.. इस बार आँखे खुली रखूँगा...
मैंने अपने मोबाइल से कैच कर लिया है.. अब तुम्हे कही जाने नहीं दूंगा..
तुम्हे नाराज़ करना नहीं चाहता.. पर तुम नाराज़ हो जाती हो..
तुमसे बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ मैं.. बस टैटू नहीं गुदवा सकता..
अब इसे कभी खोने नहीं दूंगा.. बड़ी शिद्दत से मिला है यकीन तुम्हारा..
वो पल संभाला हुआ है अब भी.. जब तुमने'ह' पे 'आ' की मात्रा लगायी थी..
चलो मान लिया मैं आँखे बंद कर लेता हु...... जब तुम गर्दन पर किस करती हो..
लों बताओ.. जब हम लड़ेंगे ही नहीं तो फिर शादी क्यों की..?
शादी का मतलब सिर्फ सेक्स होता है...? नहीं ये सवाल नहीं है..
कहो तो तुम्हे उठा कर ले चलु... आयोडेक्स तो है ना घर पे..
तुम मजाक भी नहीं समझती.. इनडायरेक्टली बेवकूफ थोड़े ही कहा मैंने..
मैं कोने में बैठा हुआ हूँ..... मेरी जान! तुम शोपिंग जो कर रही हो..
लों अब तो बर्तन भी धो दिए मैंने.. अब तो देखने दो क्रिकेट मैच..
मैं सिर्फ सुनता रहता हूँ..... फॉर अ चेंज आज सिर्फ तुम बोलो.. 
जानता हूँ टॉवेल तुम्हारा है.. अब ऐसे क्या देख रही हो..
तुम्हारी फीलिंग्स, फीलिंग्स और मेरी फीलिंग्स कुछ भी नहीं... समझ गया, मेरी फीलिंग्स कुछ भी नहीं..
तुम हमेशा वो लाल वाली साड़ी ही पहना करो डार्लिंग... इस बार खर्चा कुछ ज्यादा हो गया है
क्या करती हो यार तुम.... अरे मैंने तो कहा था "वाह! क्या करती हो यार तुम.."
चाँद की साइज़ का रैपर नहीं मिला था वरना ले आता.... जन्मदिन मुबारक जानेमन
वो आवाज़ अभी भी कानो में रहती है.. करीब आकर आई लव यु कहा था ना तुमने..
अरे भीग गया तो क्या हुआ.... तुम्हे पकौड़े खाने थे ना..
मुझे इमरान हाश्मी पसंद नहीं है... चलो आज जन्नत देखने चले..
फिर से आँख में आंसु... तुम्हे गले ही तो लगाया है..

और लास्ट में...


  • आईन्दा मुझसे बात मत करना.......... अब चुप क्यों हो?



और जिसके बिना ये पोस्ट अधूरी है... फेसबुक पर हमारे मित्र पंकज बेंगाणी की एक वॉल पोस्ट ..
"Had a good healthy fight with wife last night.We are almost certain about divorce. Alas! we are a normal couple. :)  "

और हाँ!! आपके पास भी हो कोई ऐसी लाईन हो तो शेयर कर सकते है... सकते है.. हमने रोका थोड़े ही है... :)