खट्टी मिश्री जैसी लाईफ...


हवा और तेज़ हो रही है.. पन्ने उड़ाने की चाल है.. मैंने पेपरवेट रख दिया है..
तुम्हारे ख्याल कीमती है मेरे लिए.. मैं इन्हें वेस्ट नहीं जाने दूंगा..
बड़ी मुश्किल से मिलती है हंसी तुम्हारी.. इस बार आँखे खुली रखूँगा...
मैंने अपने मोबाइल से कैच कर लिया है.. अब तुम्हे कही जाने नहीं दूंगा..
तुम्हे नाराज़ करना नहीं चाहता.. पर तुम नाराज़ हो जाती हो..
तुमसे बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ मैं.. बस टैटू नहीं गुदवा सकता..
अब इसे कभी खोने नहीं दूंगा.. बड़ी शिद्दत से मिला है यकीन तुम्हारा..
वो पल संभाला हुआ है अब भी.. जब तुमने'ह' पे 'आ' की मात्रा लगायी थी..
चलो मान लिया मैं आँखे बंद कर लेता हु...... जब तुम गर्दन पर किस करती हो..
लों बताओ.. जब हम लड़ेंगे ही नहीं तो फिर शादी क्यों की..?
शादी का मतलब सिर्फ सेक्स होता है...? नहीं ये सवाल नहीं है..
कहो तो तुम्हे उठा कर ले चलु... आयोडेक्स तो है ना घर पे..
तुम मजाक भी नहीं समझती.. इनडायरेक्टली बेवकूफ थोड़े ही कहा मैंने..
मैं कोने में बैठा हुआ हूँ..... मेरी जान! तुम शोपिंग जो कर रही हो..
लों अब तो बर्तन भी धो दिए मैंने.. अब तो देखने दो क्रिकेट मैच..
मैं सिर्फ सुनता रहता हूँ..... फॉर अ चेंज आज सिर्फ तुम बोलो.. 
जानता हूँ टॉवेल तुम्हारा है.. अब ऐसे क्या देख रही हो..
तुम्हारी फीलिंग्स, फीलिंग्स और मेरी फीलिंग्स कुछ भी नहीं... समझ गया, मेरी फीलिंग्स कुछ भी नहीं..
तुम हमेशा वो लाल वाली साड़ी ही पहना करो डार्लिंग... इस बार खर्चा कुछ ज्यादा हो गया है
क्या करती हो यार तुम.... अरे मैंने तो कहा था "वाह! क्या करती हो यार तुम.."
चाँद की साइज़ का रैपर नहीं मिला था वरना ले आता.... जन्मदिन मुबारक जानेमन
वो आवाज़ अभी भी कानो में रहती है.. करीब आकर आई लव यु कहा था ना तुमने..
अरे भीग गया तो क्या हुआ.... तुम्हे पकौड़े खाने थे ना..
मुझे इमरान हाश्मी पसंद नहीं है... चलो आज जन्नत देखने चले..
फिर से आँख में आंसु... तुम्हे गले ही तो लगाया है..

और लास्ट में...


  • आईन्दा मुझसे बात मत करना.......... अब चुप क्यों हो?



और जिसके बिना ये पोस्ट अधूरी है... फेसबुक पर हमारे मित्र पंकज बेंगाणी की एक वॉल पोस्ट ..
"Had a good healthy fight with wife last night.We are almost certain about divorce. Alas! we are a normal couple. :)  "

और हाँ!! आपके पास भी हो कोई ऐसी लाईन हो तो शेयर कर सकते है... सकते है.. हमने रोका थोड़े ही है... :)

47 comments:

pallavi trivedi March 29, 2010 2:18 PM  

क्यों ले आये नयी कार...मुझे तो वो कायनेटिक ही पसंद था! मैंने तो ऐसे ही कहा था!
चलो अब ले आये तो....वापस मत करो!

सागर March 29, 2010 2:29 PM  

ऐसी ढेर सारी एक लाइना तो हमारी चैट से निकल सकती है, नहीं :) दिलचस्प पोस्ट.

neera March 29, 2010 2:32 PM  

शब्दों का बहाव तेज़ और दिलसे है ...
Rainbow and moon is in Love..आसमान कानाफूसी कर रहा है :-)

meeta March 29, 2010 2:35 PM  

शादी कब करोगे यार ???

PD March 29, 2010 2:43 PM  

वाह.. तो तुमने फ्यूचर प्लानिंग कर ली है? हम तभी कुछ जोडेंगे जब हम भी अपना प्लानिंग कर लेंगे.. (-:

कंचन सिंह चौहान March 29, 2010 2:57 PM  

Your true colours are beautiful like a rainbow..... :) :)

excellent

संजय बेंगाणी March 29, 2010 3:51 PM  

खट्टी भी और मिश्री भी....दिल किसी पर आया लगता है.

Shiv Kumar Mishra March 29, 2010 4:02 PM  

कितना अच्छा लिखते हो तुम...बुरा मान गए? मैंने तो सच में तारीफ की थी, फिर भी? चलो, अगली बार तारीफ फिर से करूंगा.

Ashish March 29, 2010 5:05 PM  

बहुत ही अच्छी लाइने हैं. मुझे किसी की याद आ गईं. वो हमेशा बोला करती थी की "शादी के बाद बदल जाओगे.".... सचमुच ही बदल गया... पता नहीं वो कहा है...

Mohit Jodhpur March 29, 2010 6:15 PM  

shbdo sahi upyog karna to aap se sikha jye to hi badiya hoge. bhut badiya hai

डॉ .अनुराग March 29, 2010 6:36 PM  

तीन साल पीछे लौट गया .....वापस वही कुश जो मिला .....उसे पढवाया के नहीं इस पोस्ट को....?



क्नोक क्नोक......साली जिंदगी कहाँ से कहाँ ले आती है न

डॉ. मनोज मिश्र March 29, 2010 6:58 PM  

यह अच्छा अभ्यास है,पसंद आया,धन्यवाद.

सुशील कुमार छौक्कर March 29, 2010 6:58 PM  

ये खट्टी मिश्री जैसी लाईफ जुदा सी लगी। कभी किसी बात पर सालों अलमारी पर ये लिखा हुआ था " ये साली जिदंग़ी भी अपनी नही होती"

मनोज कुमार March 29, 2010 7:52 PM  

बेहतरीन। लाजवाब।

डॉ .अनुराग March 29, 2010 8:24 PM  

ओर हाँ पंकज बैगानी ने झकास लाइने क्वोट की है..

...मेरा टेबल कलेंडर भी आज का थोट दिखा रहा है

There is no point in being grown up if you can"t be childish sometimes.

प्रवीण पाण्डेय March 29, 2010 9:08 PM  

गद्यगीत है या लम्बे भावों की गीतिका ।

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) March 29, 2010 9:13 PM  

-सुनो तुम न मुझसे ठीक से बात किया करो!! ........
-ओय!!
-'पान पसंद' खाने के बाद वाली टोन मे बोला यार..
--------------------------------------------
-क्या हुआ? बोलो न?
-कुछ नही :)
-क्या हुआ?
-बच्चा हुआ.. खिलाना है?
-हाँ :)
---------------------------------------------
दिल खुश कर दित्ता कुश पाजी :)मूड बना दिये तुसी.. चलो अब भंगडा करो :D

Puja March 29, 2010 10:35 PM  

यहाँ का चाँद हर जगह से अलग होता है न? ये सवाल नहीं है.
------------
शादी करने के लिए तुमने प्रपोज किया था पहले...तो क्या हुआ शादी तो साथ साथ की न हमने, हिसाब बराबर :)
-----------------

दिलचस्प पोस्ट...अनोखी सी. मैं भी कहती हूँ यार अब शादी कर ही डालो.

राज भाटिय़ा March 29, 2010 10:43 PM  

चलिये अब जल्दी से हरियाणवी लड्डू खिला दे, फ़िर खट्टी मिट्टी भी देखे गे जी

Parul March 29, 2010 11:10 PM  

bade rochak andaaz mein nibhaya hai aapne :)

अभिषेक ओझा March 30, 2010 1:17 AM  

ये सतरंगी विरोधाभास ही तो.... वैसे अभी अनुभव नहीं है :)

अपूर्व March 30, 2010 1:59 AM  

भई यह लिम्बू-सोडा V-2 तो नही? अर्थात आपकी (थिओरेटिकल) रिसर्च का अथ-द्वितीयोध्याय टाइप!!..खैर बहुत चिकनी फ़ील्ड है यह हमारे लिये..पांव फ़िसलते हैं..सो कहने की कोशिश भी की मगर कुछ ना कह.,.,...धड़ाम!!
:-)

रंजन March 30, 2010 3:38 AM  

:)

अनूप शुक्ल March 30, 2010 6:48 AM  

आजकल के लड़के कैसी-कैसी बातें करते हैं! करते ही रहते हैं! :)

राइना March 30, 2010 8:37 AM  

lo ab bartan dho diye maine..ab to cricket dekhne do...

achchha hai

नीरज गोस्वामी March 30, 2010 5:21 PM  

तुम नटखट थे और नटखट ही रहोगे...ऐसे ही रहना क्यूँ की येही तुम्हारी पहचान है...दुनिया जाये भाड़ में....

नीरज

Reetika March 30, 2010 6:50 PM  

मैं सिर्फ सुनता रहता हूँ..... फॉर अ चेंज आज सिर्फ तुम बोलो..

aur bas tumhe sunte sunte hi zindagi yun hi beet jaaye... ek ek lafz zindagi ke sach mein dooba hua...

Read more: http://kushkikalam.blogspot.com/2010/03/blog-post_29.html#ixzz0jfKeF2Fh

गौतम राजरिशी March 30, 2010 10:16 PM  

कभी-कभी लगता है ये पूरी जिंदगी भी एक ऐसी ही वन लाइनर हो...काश कि होती!

मैं गुम क्या हुआ कुछ दिनों के लिये दो पोस्ट ठेल दी?...अच्छा किया।

Ankit Joshi March 31, 2010 4:30 PM  

हमेशा की तरह एक शानदार पोस्ट.............
आपकी पोस्ट के शीर्षक से "खट्टा-मीठा" फिल्म का गाना याद आ गया,
"ये जीना है अंगूर का दाना, कुछ खट्टा है कुछ मीठा है.........................."

sanjay vyas March 31, 2010 7:14 PM  

सिर्फ और सिर्फ जीवन. सद् गृहस्थों की संक्षिप्त-गीता है भाई.

रंजना April 1, 2010 3:55 PM  

वाह.....

शादी वाला गोलगप्पा कब खा रहे हो ???? गप्पे में घोल और मसला सब डाला हुआ जूता हुआ है...अब तो जल्दी से खा ही लो...फिर देखना और भी बहुत सी खट्टी मीट्ठी सतरंगी लाईने अपने आप रोज सामने आकर खड़ी हो जाया करेंगी...फिर किसी और से कोई लाइन मांगने की जरूरत न रहेगी...
बेंगानी जी का फार्मूला लाजवाब है...

Rakesh April 2, 2010 8:59 PM  

shadi ..aur ye aapki post ..bahut sateek hai ..aaschrya hai agar tum shadi shuda nahi ho to ..magar khushi hai ki tum pahile hi jaan gaye satya ..bahut ach a

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey April 3, 2010 9:16 PM  

ये सिचयुयेशन तो हम बारम्बार घिस चुके हैं। अब तो भाग्वदपुराण के प्रवचन का मन होता है! मेरा भी और पत्नीजी का भी!

जितेन्द़ भगत April 3, 2010 10:08 PM  

'ह' पे 'आ' की मात्रा और उसपे चॉंद लगा कर कहना ही पड़ेगा-
हॉं भाई हॉं, जबरदस्‍त है।

Anurag Geete April 4, 2010 9:47 AM  

धांसू..... लगता नहीं की आपकी शादी हुई नहीं अब तक... जनाब माजरा क्या है ?

mukti April 4, 2010 12:47 PM  

इमोशनल ब्लैकमेलिंग ...प्रैक्टिस चालू है. आगे काम आयेगी.

sepo April 4, 2010 5:31 PM  

bahut accha likha hai aapne. it's so good that people like you are promoting our traditional national language on this platform.

thanks for following my blog

अनकही.... April 4, 2010 10:09 PM  

दिल के के एहसास को शब्द मिल जाएं तो कुछ ऐसा ही होता है...

abhi April 5, 2010 12:52 PM  

मजा आ गया पढ़ के भाई, लाजवाब

Neha April 5, 2010 8:45 PM  

तुमसे बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ मैं.. बस टैटू नहीं गुदवा सकता..

badhiya hai....

Reetika April 7, 2010 10:16 PM  

isi ko mohabbat kehte hain janaab...

रंजना [रंजू भाटिया] April 8, 2010 1:59 PM  

आइन्दा ऐसा बढ़िया मत लिखना ....ज़िन्दगी कुछ और नजर आने लगती है ....
आईन्दा मुझसे बात मत करना.......... अब चुप क्यों हो?

बेचैन आत्मा April 14, 2010 12:36 AM  

कुश की कलम पढ़ी और वाकई खुश हो गए।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' April 15, 2010 12:16 PM  

कितनी सारी बातें हैं
कितनी प्यारी बातें हैं . :)

kush April 20, 2010 5:10 PM  

hey nice man.

kshama April 23, 2010 5:10 PM  

मुझे इमरान हाश्मी पसंद नहीं है... चलो आज जन्नत देखने चले..
फिर से आँख में आंसु... तुम्हे गले ही तो लगाया है..

Aankhon me halki-si nami aa gayi...

पूजा प्रसाद May 19, 2010 11:49 PM  

ये सब क्या सा कह दिया आपने कुश..बहुत बढ़िया नहीं कह रही बहुत सच्चा और लगभग हरेक के मन के करीब..

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वो बात कह ही दी जानी चाहिए कि जिसका कहा जाना मुकरर्र है..

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जयपुर, राजस्थान, India
खुद को ढूँढने की कोशिश में कितने ही थानों पर अपनी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुका हूँ.. भूली हुई याददाश्त साथ लेकर जितना जिया जा सकता है उस से थोडा सा ज्यादा जी रहा हूँ.. ईश्वर की बनायीं दुनिया से अभी तक विश्वास उठा नहीं है.. इसलिए अभी तक यही पड़ा हूँ.. बर्दाश्त की हद से थोडा ज्यादा बर्दाश्त कर लेता हूँ.. गुलज़ार को समझने की कोशिश जारी है.. अनुराग जैसा सिनेमा बना लु तो कुछ सुकून मिले.. दोस्तों की फेहरिस्त लम्बी है.. पसंदीदा फिल्मो की फेहरिस्त लम्बी है, क्या कहूँ साला यहाँ ख्वाहिशो की फेहरिस्त लम्बी है.. यहाँ वहां जब कही कुछ बात नहीं बनी तो ब्लॉग बना लिया..देखते है इस से अब कब तक बनती है..

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