क्रिकेटर ले लो क्रिकेटर ले लो

हमेफोन उठाते ही आवाज़ आई क्रिकेटर ले लो.. क्रिकेटर ले लो.. हम बौखलाए.. भाई ये क्या है.. नयी रिंगटोन. नया फोन.. और लोन के लिए तो फोन आते थे ये अब क्रिकेट का क्या चक्कर है. हमने पूछा भय्ये माज़रा क्या है.. क्या बक बक कर रहे हो..? वो बोला देखिए श्रीमान मैं तमीज़ से बात कर रहा हू और आप इसे बक बक कह रहे है.. आप नही जानते आप कितने भाग्यशाली है की मैने आपको फोन किया है.. अमा क्रिकेटर्स की नयी टीम बन रही है.. आप भी खरीद लीजिए. फ़ायदा ही फ़ायदा है..

पहले सरस्वती जी के सुर होते थे अब माता लक्ष्मी की ताल होती हैफ़ायदा ! हिन्दुस्तानी आदमी के लिए इस से बढ़िया शब्द क्या हो सकता है.. और हम भी ठहरे पक्के हिन्दुस्तानी.. सो हमने कहा बतलाओ जी कैसा फ़ायदा.. वो खुश होकर बोला.. अजी आप रातो रात स्टार बन जाओगे.. कैमरा मैदान पर खिलाड़ियो से ज़्यादा आप पर रहेगा.. आप आगे आगे खिलाड़ी पीछे पीछे.. इतना सुनते ही हमने ख्यालो की तलैया में डुबकी मार ली..और स्टेज पर दो चार ठुमके लगा लिए.. वो बोला ये तो कुछ नही है सर.. नाचने गाने का पूरा मौका है.. बड़ी बड़ी म्यूज़िक कंपनिया स्पोंसर कर देगी. एक पॉप अलबम बनाओ और पूरी टीम के खिलाड़ियो के साथ ठुमके लगाओ.. हमने पूछा खिलाड़ी ओर ठुमके..? वो तो खिलाड़ी है उनका काम तो खेलना है.. वो हमारी अज्ञानता पर मुस्कुराया. और बोला क्या साहब आप भी..? आजकल तो जिसे देखो वो ठुमका लगा रहा है.. समय बदल रहा है सर पहले सरस्वती जी के सुर होते थे अब माता लक्ष्मी की ताल होती है और सब बस उसी ताल पर बेताल नाचते रहते है.. खिलाड़ी हो या नेता कोई फ़र्क नही पड़ता..

हम अपनी इस अज्ञानता पर बहुत लज्जित हुए.. हमे लगा जैसे हम कौनसी दुनिया में जी रहे है.. बाहर इतना सब हो रहा है ओर हमे पता ही नही.. हमने कहा लेकिन भैया खाली खिलाड़ी के आगे चलना ओर ठुमके लगाने से क्या होगा.. इसमे भला क्या मज़ा है.. वो हंसा और बोला क्या सर आप भी..? दुनिया मेट्रो ट्रेन में भाग रही है ओर आप है की साइकल रिक्शा में बैठे है.. अरे जनाब पैसा और क्या.. ? टीम जीती तो आपको पैसा मिलेगा.. टिकट बिके तो आपको पैसा मिलेगा.. उनके हेल्मेट पे स्पॉंसर का एड दे सकते हो.. बैट पे दे सकते हो.. ग्लव्स पे दे सकते हो.. यहाँ तक की उनके चड्डी बनियान पर भी एड दे सकते हो आप.. अजी क्रिककेटर खरीदा है आपने.. कोई मामूली बात थोड़े ही है..
हम बड़े खुश हो लिए.. भाई बात तो तुम्हारी ठीक है.. अच्छा अब ज़रा सौदे की बात भी कर ले.. ये बताओ क्या भाव दिए क्रिकेटर..? उसने कहा वैसे तो बाज़ार बहुत गर्म है..ये बताओ क्या भाव दिए क्रिकेटर..? पर क्योंकि आप मुझे भले आदमी लगते है इसलिए आपको डिसकाउंट दूँगा.. आप ऐसा करो की सौ की कीमत है पर आप चाहो तो नब्बे दे दो.. हमने कहा अरे कैसी बात करते हो बंधु.. पुर सौ लो..दस रुपये के लिए क्या सोचना.. इस बार वो ज़ोर से हसा क्या अंकल आप भी मज़ाक बहुत करते हो.. मैं सौ रुपये नही सौ करोड़ की बात कर रहा हू.... सौ करोड़ !!!!!!!! हमने छाती पे हाथ रखकर अटैक को आने से रोका.. और बोले भय्ये सौ करोड़? अबे तू आदमी है या घनचक्कर.. तुम क्या दुनिया को बेवकूफ़ समझते हो की कोई इतनी महँगी टीम खरीदेगा..

वो फिर मुस्कुराया और बोला सर आप बहुत भोले हो.. सारी टीम बिक गयी है बस एक बची है.. आप जल्दी से बता दो वरना मैं किसी और को फोन लगाऊँगा.. हमने अपना घर बार सबकी कीमत लगाई तो ही बीस लाख से ज़्यादा नही हुआ.. टीम कहा से खरीदते...? हमने कहा बाबू साहब मेरे पास तो इतना रुपया नही है.. वो फिर ज़ोर से हंसा और बोला सर क्यो मज़ाक करते हो आपके पास पैसा नही होगा तो फिर किसके पास होगा.. आप तो इतने बड़े आदमी है.. हम सकपकाए और बोले भैया बड़े सड़े कुछ नही हम तो मामूली आदमी है बॅंक में नौकरी करते है.. वो चौंक गया बोला लेकिन आप तो मशहूर अभिनेता हृतिक कुमार है.. हम बोले भैया कहा हृतिक कुमार और कहा हम.. लगता है आपने रॉंग नंबर मिलाया है..

और सामने से खट्ट की आवाज़ आई.. शायद सुबह से बोनी नही हुई थी उसकी...

32 comments:

रंजन May 6, 2009 12:48 PM  

haahaa... सही है, खरीद कर फायदा ही हो कोई गारंटी नहीं..

अभिषेक ओझा May 6, 2009 12:55 PM  

क्या बात है ! बड़े-बड़े लोगों के कॉल डाइवर्ट हो रहे हैं आजकल. बड़े-बड़े लोगों की महँगी टीमों का भी यही हाल है. सब उल्टा पुल्टा हो रहा है इस खरीद विक्री में.

ताऊ रामपुरिया May 6, 2009 1:07 PM  

हां आजकल रांगनम्बर कुछ ज्यादा ही लग रहे हैं?:) पर िन सांडों को खरीद कर क्या करेंगे?

रामराम.

अनिल कान्त : May 6, 2009 1:34 PM  

ha ha ha ha
bhai waah ...maza aa gaya
jhakaas

Anil Pusadkar May 6, 2009 2:10 PM  

मज़ा आ गया।इस बार फ़ोन आया है होसकता है अगली बार मुहल्ले गली मे कोई चिल्लाता नज़र आ जाये क्रिकेटर ले लो।ले लो रस्ते का माल सस्ते मे ले लो। हा हा हा हा हा।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi May 6, 2009 2:18 PM  

बहुत अच्छे!

विवेक सिंह May 6, 2009 3:15 PM  

खरीदना है तो अम्पायर खरीदिये :)

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) May 6, 2009 3:28 PM  

बोनी नहीं हुई तो दस बीस ग्राम ले लेंगे.. पर ज्यादा नहीं.. :)

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey May 6, 2009 4:14 PM  

इस तमाशे को देखा नहीं मैने। पर इतनी इतनी कीमत है तो एक टीम मालिक दूसरी से अण्डरहैण्ड डीलिंग तो करता होगा कि नहीं।
खैर यह नूरां कुश्ती सा है और जनता जल्दी बोरिया भी जायेगी इस तमाशे से!

महामंत्री - तस्लीम May 6, 2009 4:21 PM  

ये आईपीएल वालों ने सब कुछ क्रिकेटिया बना दिया है।

-----------
SBAI TSALIIM

रंजना [रंजू भाटिया] May 6, 2009 4:21 PM  

मजेदार है :) सही लिखा है ..

Shiv Kumar Mishra May 6, 2009 6:13 PM  

अरे खरीद लेना चाहिए था. चेक से पैसे देकर कैश वापस ले लेते. सभी कर रहे हैं.
राँग नंबर फ़ोन के वार्तालाप भी गजब होते हैं.
बहुत बेहतरीन लिखा है. ताजातरीन लिखा है.

सुशील कुमार छौक्कर May 6, 2009 6:22 PM  

वाह। कुश भाई क्या ताल लगाई है। मजा आ गया।

अशोक पाण्डेय May 6, 2009 6:34 PM  

विवेक सिंह जी ठीक कह रहे हैं। अंपायर को ही खरीद लीजिए, काम आएंगे :)

डॉ .अनुराग May 6, 2009 8:04 PM  

जभी तो शाहरुख़ खान गावस्कर को क्रिकेट खेलना सिखा रहे है

दिगम्बर नासवा May 6, 2009 9:49 PM  

वाह.......क्या क्रिकेटर पुराण........मजेदार है बहूत ही .............ऐसा टाइम न आ जाई..........क्रिकेटर छाबरी वालों पर बिकने लगें

डॉ. मनोज मिश्र May 6, 2009 9:54 PM  

सही जा रहें हैं भाई .

neelima sukhija arora May 6, 2009 10:04 PM  

सही है, खरीद कर फायदा ही हो कोई गारंटी नहीं..

neeraj badhwar May 6, 2009 10:07 PM  

बढ़िया लिखा है कुश भाई।

Pushpendra Paliwal May 6, 2009 11:51 PM  

मौका गवा दिया टीम खरीदने का !!
सौ करोड़ की ही तोह बात थी ,हम आपको पर्सनल लोन दिलवा देते.
कुछ नही तोह हमारा नम्बर ही दे देते ,हम खरीद लेते टीम को.

डा० अमर कुमार May 7, 2009 4:43 AM  

सही है, जी ! बीस साल बाद करकट के भी दिन फिरते हैं,
और.. वह करकट से किरकट हो जाता है !
पण, संकीर्ण विचारधारा की इस घटिया पोस्ट पर कोई टिप्पणी अब तक क्यों न आयी ?

बदलते समय की माँग है, क्रिकेट.. एको क्रीड़ा द्वितीय नास्ति !
कल तीतर की लड़ाई देखने तो आये नहीं .. और यह पोस्ट लिख दिया ।
दोनों में घालमेल चल रहा है, या तालमेल ?
क्रिक्वेट से पैसा है.. या पैसे से क्रिकेट है ?
हे राजन, इसका सही सही ज़वाब दो, अन्यथा तेरा कलम टुकड़े टुकड़े हो जायेगा !

अनूप शुक्ल May 7, 2009 8:10 AM  

क्रिकेटरों के भाव गिरें तो हम भी लोन लेकर एकाध खरीदने की सोचें। सोच ही सकते हैं खरीदना तो बस के बाहर की बात है।

ashish May 7, 2009 11:25 AM  

bahot hi badhiya janab....

नीरज गोस्वामी May 7, 2009 11:45 AM  

आप ने ये पोस्ट लिख कर शाहरुख़ खान से पंगा ले लिया है...अच्छा किया...आज कल बिचारे की ऐसी हालत हो रही है की कोई भी उस से पंगा ले सकता है...खूब पोल खोली है आपने आ.ई.पी.एल. की ललित मोदी जी जयपुर आकर धर लेंगे आपको देख लेना...
नीरज

Syed Akbar May 7, 2009 2:31 PM  

खरीद तो लेंगे पर कहीं बाद में शाहरुख़ खान की तरह रोना ना पड़ जाए.

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर May 7, 2009 2:53 PM  

हम तो भाई न ही खरीदते !!
आखिर हमारी स्कूल की टीम में जो हैं एक से बढ़कर एक धुरंधर !!



प्राइमरी का मास्टरफतेहपुर

Pyaasa Sajal May 7, 2009 5:03 PM  

Sir Ji khareed lijiye...bas dekh lijiyega koi farzi player na ho aapki team me...ab player khelne ke alawa aur thumke lagane ke alawa fake blog bhi likhte hai...bloggers ki bhi pet pe laat maarenge

bahut dilchasp laga ye post...vaise mujhe khud to in sabke baad bhi IPL me bada zardaar interest hai :)

www.pyasasajal.blogspot.com

Arvind Mishra May 7, 2009 9:04 PM  

सही कहा ,हमने अंतर्जाल और हिन्दी ब्लागजगत में भी कुछ ऐसे ही खरीद फ़रोख्त के मामले देखे हैं -अब अपने भेजे में ये सब घुसता ही नहीं !

गौतम राजरिशी May 8, 2009 12:16 AM  

काश हमें कोई हृतिक समझ कर फोन करता.....

प्रकाश गोविन्द May 8, 2009 8:33 PM  

बहुत खूब !

अल्पना वर्मा May 9, 2009 3:23 PM  

bahut badhiya vayangy kasaa hai...khareed farokht mein SRK jaisee halat na ho jaye..dhyan rakhen

रावेंद्रकुमार रवि May 10, 2009 9:12 AM  

भइ, वाह! बहुत सुंदर!

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वो बात कह ही दी जानी चाहिए कि जिसका कहा जाना मुकरर्र है..

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जयपुर, राजस्थान, India
खुद को ढूँढने की कोशिश में कितने ही थानों पर अपनी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुका हूँ.. भूली हुई याददाश्त साथ लेकर जितना जिया जा सकता है उस से थोडा सा ज्यादा जी रहा हूँ.. ईश्वर की बनायीं दुनिया से अभी तक विश्वास उठा नहीं है.. इसलिए अभी तक यही पड़ा हूँ.. बर्दाश्त की हद से थोडा ज्यादा बर्दाश्त कर लेता हूँ.. गुलज़ार को समझने की कोशिश जारी है.. अनुराग जैसा सिनेमा बना लु तो कुछ सुकून मिले.. दोस्तों की फेहरिस्त लम्बी है.. पसंदीदा फिल्मो की फेहरिस्त लम्बी है, क्या कहूँ साला यहाँ ख्वाहिशो की फेहरिस्त लम्बी है.. यहाँ वहां जब कही कुछ बात नहीं बनी तो ब्लॉग बना लिया..देखते है इस से अब कब तक बनती है..

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