जब ब्लोगरो ने खेली होली..

टॉम कहे चलो होलियाए
डिक कहे चलो होलियाए
हैरी कहे चलो होलियाए
हम कहा चलो हम भी होलियाए..

उपरोक्त पंक्तियो का किसी भी घटना या किसी व्यक्ति से संबंध है तो सही.. पर किस से है ये पता नही चल पा रहा है.. पता चलते ही आपको सूचित किया जायेगा..


तो जी बात ऐसी है.. कि कल शायद हम खिसकले अपनी जन्मभूमि जोधपुर क़ी ओर.. और लौट कर तो होली बाद ही आएँगे.. तो फिर होली खेलने का चानस कैसे जाने दे.. तो हमने फ़ैसला किया है.. क़ी हम एक ठेला लेकर उसमे गुलाल सुलाल डालकर जा रहे है होली खेलने.. कहाँ? अजी ब्लॉगीवूड़ में.. तो आप हो जाइए तैयार.. हम आ रहे है ठेला लेकर..

ठेले में हर तरह के गुलाल लेकर होली खेले रघुवीरा टाइप गाना गाते हुए हम जा पहुँचे शिव कुमार मिश्रा जी के यहाँ.. मिश्रा जी बैठे बैठे गुझिया बना रहे थे.. हमे देखते ही बोले "कूस (कुश) कैसे हो भई?" हमने कहा जी मेल मिलाप तो होता रहेगा.. पर आप आज बचेंगे नही.. ये कहके हमने उनके माथे पर तिलक लगा दिया..

हमको तिलक लगाता देखते ही अनिल पुसदकर जी आ गये.. आते ही गरजे अरे भई ये क्या? तिलक क्यो लगा रहे हो पानी से खेलो.. कोई सुखी होली नही चलेगी.. हमने कहा ऐसी बात नही है अनिल जी होली तो अपुन भी पानी से खेल ले.. पर क्या है क़ी मंदी है थोड़ी पहले ही.. रंग उतारने में जो साबुन लगेगा वो बड़ा महंगा पड़ेगा..

हमारी बात मानकर वो भी साथ में हो लिए.. ओर हम पहुचे ज्ञान जी के घर.. बाहर छोटे छोटे पिल्ले बैठे थे.. हमने उनसे बचते बचाते घंटी बजाई.. अंदर से आवाज़ आई कौन? अपने मिसिर जी बोले भैया मैं,आपका लक्ष्मण.. इतना सुनते ही ज्ञान जी बाहर आए ओर हमने गुलाल लेकर उनके गालो पर लगाया.. वो बोले अरे ये कही नकली गुलाल तो नही.. हिन्दुस्तान में प्रति वर्ष तीनसौ क्विंटल नकली गुलाल का उत्पादन होता है.. अगर क्रम यही रहा तो.... हमने बात बीच में ही काटी अरे सर जी आप क्यो चिंता करते है.. स्किन को कुछ हो भी गया तो अपने डा अनुराग कब काम आएँगे... आख़िर हमारे लिए ही तो वो डर्मेटोलॉजिस्ट बने..

हमारी बात मान कर ज्ञान जी भी हो लिए हमारे साथ.. ओर दोनो हाथ जेब में डालकर चल पड़े .. डा अनुराग बाहर बैठे मिल गये हमको.. हमने पूछा डा साहब बाहर क्या कर रहे है.. तो उन्होने कहा..
रोज़ ज़िंदगी लिख देती है फ़लसफ़े
ईमान क़िस्सो में भी अब नही मिलते

आईने में एक शख्स नज़र आता है मुझे...

मिसिर जी ओर ज्ञान जी एक दूसरे क़ी तरफ देखने लगे.. हम आगे गये ओर उनके माथे पर तिलक लगाया.. डा साहब बोले होली तो हम होस्टल में खेलते थे अब तो केवल रस्म अदायगी होती है.. पर हम तो ऐसे नही खेलेंगे .. इतना बोलके उन्होने पास में पड़ी कलर वाले पानी क़ी बाल्टी हमारे ऊपर डाल दी.. ये देखते ही अनिल जी खुश हो गये.. बोले साधु वाद आपको..

साधु वाद क़ी बात आते ही हम समीर जी के घर क़ी ओर निकले.. ज्ञान जी ने कहा उनके लिए एक्स्ट्रा गुलाल लेना पड़ेगा.. तो ओर गुलाल लिया गया.. जैसे ही समीर जी के यहा पहुँचे तो पता चला वो तो पहले ही होली खेल रहे थे.. सभी जबलपुर भाइयो के साथ.. वही हमे महेंद्र मिश्रा जी, बवाल भाईसाहब सब मिल गये.. सबने एक दूसरे को रंग लगाया.. समीर जी बोले अब तो हम कुछ सुनाएँगे होली पर..

कभी ना भूलना यार मेरी बोली
त्योहारों में एक ही त्यौहार है होली
त्योहारों में एक ही त्यौहार है होली
तो फिर चल पड़ी है यारो क़ी टोली..

सभी बहुत उम्दा, वाह, सुंदर अभिव्यक्ति टाइप कहने लगे.. इतने में अनूप शुक्ल जी सड़क के उस तरफ से आते दिखे.. हमने कहा आप वहा क्या कर रहे थे.. वे बोले समीर जी के गाना ख़त्म करने का इंतेज़ार..

ओर सभी ठहाका मार कर हंस पड़े.. समीर जी भी मुस्कुराने लगे ओर मुस्कुराते हुए उन्होने अनूप जी के गाल खींचते हुए कहा ''यू नॉटी बॉय" इस पर अनूप जी बोले अजी हम कहा नॉटी बॉय है.. नॉटी बॉय तो अभी टंकी पर बैठा है..

इतने में मिसिर जी बोले अरे भई टंकी से उतारो उसको वरना कही टंकी के पानी में रंग वॅंग मिला दिया तो शाम को सोडे से काम चलाना पड़ेगा.. ओर सभी पहुँच गये विवेक बाबू को पकड़ने टंकी पर..

सबने रिकवेस्ट क़ी पर विवेक नीचे नही उतरे.. तब अपने अनुराग जी ने कहा अरे ये नीचे पाँच का सिक्का किसका पड़ा है.. इतना सुनते ही विवेक बोले अरे शायद मेरा गिर गया होगा.. रूको मैं अभी लेता हू.. ओर जैसे ही वो नीचे आए सबने उनको रंग दिया.. समीर जी भी आगे आए ओर विवेक के माथे पर रंग लगाया ओर गले मिलते हुए बोले हेप्पी होली...

इतने में अमर कुमार जी आ गये.. बोले यार मेरी कॉफी अटका के कहा चले गये तुम .. हमने कहा डा साहब कॉफी भी पिलाएँगे.. पहले होली तो मना ले.. इतना बोलके सबने एक एक करके डा साहब को रंग लगाया.. ज्ञान जी बोले भई मैं तो गले मिलकर बधाई दूँगा.. ओर दोनो ने गले मिलकर एक दूसरे को बधाई दी..

बधाई चल ही रही थी.. इतने में किसी कुत्ते के भोंकने क़ी आवाज़ आई.. ज्ञान जी बोले कही मेरे घर के पिल्ले पीछे पीछे तो नही आ गये.. पर ऐसा नही था.. ये तो अपना बीनू फिरंगी था. जो भोंक भोंक कर शायद ये कह रहा हो क़ी बा अदब बामुलाहिजा होशियार.. ठगो के सरदार पहेलियो के असरदार ताऊ पधार रहे है..

ताऊ अपनी रामप्यारी पर बैठे सबपर गुलाल फेंकते फेंकते आ रहे थे.. जैसे पास में आए सबने मिलकर ताऊ को पकड़ लिया ओर खूब गुलाल लगाया.. ताऊ क़ी ही दूसरी भैंस पर बैठा था अपना पी डी.. जब हमने कहा नीचे उतरो तो बोला हमारी टाँग में सूजन है.. इसलिए नही आ सकते.. सबने कहा कोई बात नही ओर सबने पी डी को भैंस पर बैठे बैठे ही रंग लगा दिया..

इतने में अपना अभिषेक आ गया.. आते ही अभिषेक ने कहा आप क़ी गिनती तो बढ़ती जा रही है.. समय के हिसाब से अगर मैं लोगो का गुना करू तो थोड़ी देर में यहा ओर लोगो आने वाले है.. ओर दिल से दिल क़ी जोड़ तो बहुत रंग लाएगी.. इस पर समीर जी बोले यार तुम यहा भी गणित ले आए.. आज तो होली है.. इतना बोलके समीर जी ने अभिषेक को रंग लगाया..

सब ये हल्ला कर ही रहे थे.. क़ी रचना जी आ गयी.. गुस्से में बोली.. आप सब पुरुष लोग अकेले अकेले होली खेलने आ गये.. कम से कम आज तो हम महिलाओ को समानता का अधिकार दे दीजिए.. इस पर डा अमर कुमार जी बोले अजी अधिकार तो आपका है ही मांगिए मत छीन लीजिये.. ओर सभी ठहाका मार के हंस पड़े.. हमने भी रचना जी को गुलाल लगाया.. वे बोली बाकी क़ी भी सब बहनिया साथ ही है..

इतना कहते ही सभी लेडीज़ ब्लॉगरणिया भी आ गयी.. ताऊ जी भैंस के पास खड़े होकर बोले.. सु.सीमा जी कही दिखाई नही दे रही है.. इतना सुनते ही सबने एक बार फिर ठहाका लगाया... समीर जी बोले क्यो ताऊ आते ही अपने संपादको को ढूँढने लगे अपने दोस्तो को भूल गये.. भाटिया जी ओर योगेंद्र मौदगिल जी के बारे में तो पूछा ही नही..

ताऊ बोले अरे ऐसी बात नही है.. वो तो कब से वहा बैठकर ठंडई बना रहे है.. वो भी जर्मन स्टाइल में.. ये सुनते ही होली का रंग दुगुना हो गया..

भीड़ में हमे एक लंबा साया दिखा.. जब गौर से देखा तो पता चला रंजना भाटिया जी थी.. हाथ में अमृता प्रीतम क़ी किताब लेकर आई थी.. इस पर कंचन जी बोली बोली अरे रंजू जी आप यहाँ पर भी अमृता जी को साथ ले आई..

ममता जी बोली अरे तो क्या हो गया. इसी बहाने अमृता जी भी हमारे साथ होली खेल लेगी.. तभी पीछे से पूजा चिल्लाई अरे सब लोग मुझे तो भूल ही गये.. मैं भी तो हू यहाँ.. इतना सुनते ही सबने देखा पी डी भैंस से उतर चुका है.. सबने पी डी को वापस भैंस पर बिठाया..

किसी ने कहा गुलाल ख़त्म हो गया.. ये लो आ गया गुलाल.. सबने मुड़कर देखा तो अरुण पंगेबाज जी आ गये थे साथ में वकील साहब दिनेश जी भी थे.. उनके आते ही एक सकारात्मक उर्जा का संचार हुआ.. सब लोग खुश हो गये.. तरह तरह के गुलाल आ गये थे. .सबने एक दूसरे को रंग लगाया..

ओर सब साथ मिलकर चल पड़े अरविंद मिश्रा जी के घर.. जैसे ही उनके घर पहुँचे तो देखा मिश्रा जी घर पर देव डी फिल्म देख रहे थे.. सबने उनको वही पकड़ लिया और गुलाल लगा दिया.. उनके माथे से लेकर गर्दन और हाथ से आते आते उनके पाँव तक गुलाल दिया.. वो बोले यार पूरे शरीर पर रंग लगा दिया.. अब तो दोबारा पर्यवेक्षण करना पड़ेगा..

इस तरह वो भी हमारी टोली में शामिल हो गये.. इतने में कोई बोला अरे मसिजीवी परिवार तो कही नज़र नही आ रहा.. उनके घर पहुँचे तो पता चला आज चिट्ठा चर्चा करने क़ी बारी उनकी थी.. तो वो आपस में तय नही कर पा रहे थे क़ी कौन चर्चा करे..

अनूप जी बोले इसमे कौनसी बड़ी बात है.. आप अख़बार में आपका भविष्यफल पढ़ लीजिए क़ी आज आपके भविष्य में चर्चा करना लिखा है क़ी नही.. इस पर मसिजीवी जी ने ज़ोर से ठहाका लगाया.. हालाँकि वो रंगे हुए चेहरो में पहचान नही पाए.. संगीता पूरी जी भी हमारे साथ थी.. पर संगीता जी ने कहा.. परिवार में हँसी ठिठोली नही होगी तो कहाँ होगी.. ज़रूरी थोड़े ही है क़ी परिवार में सबकी सोच समान हो.. आज तो होली है.. रंग लगाओ ओर खुशिया मनाओ..

इतना सुनते ही सब ज़ोर से बोले होली है.. नीलिमा जी और सुजाता जी सबके लिए पकोडे लेकर आ गये.. सबने पकोडे खाकर ही आगे जाने का प्रोग्राम बनाया..

पकोडे खाने के बाद सभी बाहर निकले ही थे क़ी सामने से पुलिस क़ी जीप आती हुई दिखाई दी.. ताऊ जी पीछे हो लिए उन्हे लगा गोटू सुनार पुलिस लेकर आ गया.. पर जब देखा तो उसमे से पल्लवी जी निकली. पल्लवी जी उतरते ही बोली अरे आप लोग कहाँ गायब थे मैने सब जगह देख ढूँढा आपको..

समीर जी बोले.. अरे हम तो यहा बैठे पकोडे खा रहे थे.. खैर अब आ ही गयी तो होली तो खेल ही लेते है.. पी डी ने फिर नीचे उतरने क़ी कोशिश क़ी पर सबने वापस भैंस पर बिठा दिया..

पल्लवी जी के आते ही माहौल और जम गया.. उन्होने आते ही जोरदार गाना गया.. रंग बरसे भीगे चुनर वाली.. ओर सभी ने उस पर डांस करना शुरू किया.. ज्ञान जी तो दोनो हाथ उठाकर डांस कर रहे थे.. अनुराग जी ने भी समीर जी के साथ ठुमके लगा लिए.. मिसिर जी और ताऊ पत्नग उड़ाने वाली स्टाइल में नाच रहे थे.. लेडीज़ गेंग ने घूमर शुरू कर दिया.. अनूप जी नागिन स्टाइल वाला डांस करने लगे.. अनिल जी और वकील साहब भी कहा पीछे रहने वाले थे.. अरुण जी और मसिजीवी भी जोश में आ गये.. अभिषेक और हम ढोलकी पे थाप देने लग गये..हमारे साथ अमर कुमार जी भी आ गये..

पी डी भैंस पर बैठे बैठे ही डांस कर रहा था.. कुल मिलकर पूरा मस्ती का माहौल था.. सभी होली के रंगो में घुल गये थे.. ओर बड़ी धमाकेदार परफॉर्मेंस चल रही थी..

तभी वहा पर सुशील कुमार छौक्कर ओर सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी जी भी आ गये.. आते ही बोले अकेले अकेले डांस हो रहा है.. हम भी करेंगे.. ओर वे भी हो लिए साथ में.. सबने सुशील जी से पूछा.. बिटिया कहा है? तो उन्होने कहा वो तो वहा आदित्य, लवीजा ओर मिष्टी के साथ होली खेल रही है... इतना सुनते ही सब वहा निकल पड़े.. आदि पलटी मार मार कर होली खेल रहा था.. लवी बिटिया बुढ़िया के बाल खा रही थी.. ओर मिष्टी बिटिया नीरज जी के कंधे पर बैठ के डांस कर रही थी..

वहा पहुँचते ही नीरज जी ने होली पर अपने गुरु प्राण साहब क़ी रहनुमाई में लिखी हुई ग़ज़ल सुना दी सबको..

ब्लॉगर गण मिलकर आज मना लो होली
जब फ्री हो जाओ तो आ जाना खोपोली..

सबने मिलकर नीरज जी को रंग लगाया.. सबको इस तरह से खुश देखकर लावन्या जी को अपने बचपन के दिन याद आ गये जब वे अमिताभ बच्चन ओर लता जी के साथ होली खेला करती थी.. लेकिन मीनाक्षी जी ने उन्हे कहा अरे ब्लॉगर बच्चन नही है तो क्या हुआ.. दूसरे तो ब्लॉगर है.. इतना सुनकर लावन्या जी बोली बिल्कुल सही कहा..

ओर सब हंसते हँसते जा पहुंचे ब्लॉगवानी के ऑफीस वहा पहुँचते ही मैथिली जी और सिरिल बाबू आ गये पकड़ में सबने उनको रंग लगाया.. और ब्लॉगवानी साईट बनाने के लिए धन्यवाद दिया.. जिसके कारण आज सभी लोग एक परिवार से लगते है..

बस फिर वही ब्लॉगवानी के ऑफीस में भाटिया जी और मौदगिल जी ठंडाई लेकर आ गये ओर सबने खूब छककर ठंडाई पी.. अंत तक गज़लो का, गीतो का.. डांस का दौर चलता रहा.. ओर सभी एक दूसरे को होली क़ी शुभकामनाए देते रहे..

सबसे आख़िर में मैने सबसे कहा.. आप सभी को रंगो के इस पर्व क़ी बहुत बहुत बधाई.. ये होली आपके जीवन में नये रंग लेकर आए.. इस होली पर जम कर होली खेले.. अपने घर के बच्चो को इस त्योहार का महत्त्व बताए.. होली पर केमिकल युक्त रंगो का प्रयोग ना करे.. होली सूखी खेले या गीली.. पानी का कम से कम उपयोग करे.. इसी के साथ आप सभी को होली की अग्रिम शुभकामनाये..

47 comments:

अंशुमाली रस्तोगी March 7, 2009 11:56 AM  

दुख है, आपकी इस होली-पार्टी में हम न हुए। बहरहाल, होली की शुभकामनाएं।

रंजन March 7, 2009 11:56 AM  

बहुत शानदार होली.. भाई पूरे ब्लोगजगत में घूम आये.. शुभकामनाऐं..

वैसे पल्टू तो पल्टी मार गया, पर मैं हूं न.. मिलते है..

ज्ञानदत्त । GD Pandey March 7, 2009 12:05 PM  

पढ़ने में बहुत सुन्दर लग रहा है। काश यह भौतिक रूप से एक स्थान पर हो पाता!
बहुत सुन्दर और सटीक कल्पना है मित्र। और बहुत कम ही ऐसा कर पाने की कबलियत रखते हैँ!

mehek March 7, 2009 12:12 PM  

waah bahut hi rangin rangi hai blogger holi jabardast:)

neeshoo March 7, 2009 12:25 PM  

कुश भाई होली मुबारक । अच्छी हुडदंग मचायी है इस होली .............

Anil Pusadkar March 7, 2009 12:28 PM  

होली है।बुरा न मानो होली है।
असली से भी ज्यादा असली होली खेल ली आज तो,कुश भाई होली का असली मज़ा आ गया।एक्दम शुद्ध यानी बिना मिलावट यानी बिना पानी यानी एक्दम नीट यनी झक्कास,बोले तो फ़र्स्ट किलास्।
होली की रंग-बिरंगी बधाई। अभी से।

लाल और बवाल (जुगलबन्दी) March 7, 2009 12:34 PM  

हा हा कुश भैया, आपने तो होली का अजब माहौल बना दिया। वाह वाह वाह! ये तो वास्तव में ब्ला॓गीवुड की होली हो गई। हमारी तरफ़ से आपको बहुत बहुत साधुवाद और बधाई, इस अति सुन्दर रंग यात्रा के लिए। बहुत आनंददायी पोस्ट।

रंजना [रंजू भाटिया] March 7, 2009 12:34 PM  

वाह जी वाह .. खूब रंग आपने तो बहुत बढ़िया ....इस से बेहतरीन होली कोई हो ही नहीं सकती ..हर ब्लॉगर के रंग को आपने अपने रंग में बहुत अच्छे से रंग दिया ...होली की बहुत बहुत बधाई ..

नीरज गोस्वामी March 7, 2009 1:02 PM  

गदगद हो गए हो गए हम तो आप की होली चर्चा पढ़ कर...भाई होली से पहले ही आनंद आ गया...मिष्टी इस बार अपने चाचा को रंगने आने वाली थी लेकिन आप तो भाग रहे हैं जोधपुर को...हम समझा देंगे उसे की ऐसे डरपोक चाचा से क्या होली खेलनी... अगले साल खेलना...
आप को होली की ढेरों शुभकामनाएं...थोडा सा गुलाल हमारे नाम का भी लगा लेंगे तो मजा आ जायेगा...

नीरज

अन्तर सोहिल March 7, 2009 1:20 PM  

बहुत सुन्दर, मजा आ गया। यह आनन्द, मस्ती और यह चहचहाट उम्रभर आप सबकी जिन्दगी में बनी रहे। होली की शुभकामनायें ।

poemsnpuja March 7, 2009 1:22 PM  

वाह कुश, क्या रंग बिखेरे हैं होली के हमारा तो दिल खुश हो गया यहाँ इतने लोगो के साथ होली खेल कर...क्या माहौल है ब्लॉगजगत में, कहीं गुझिया सम्मलेन हो रहा है, कहीं रंग बरसे करा रहे हो...बड़ा अच्छा लग रहा है, वर्चुअल ही सही, होली तो खेल लिए. घर जाओ होली मनाओ, पूआ दहीबडे खाओ...होली मुबारक!

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) March 7, 2009 1:51 PM  

वाह जी... सबके चेहरे लाल-गुलाबी नजर आ रहे हैं.. हमसे भी गुलाल लगवाते जाइए..

कविता वाचक्नवी March 7, 2009 1:54 PM  

लगता है, अगली ब्लॊगर मीट हॊली वाले दिन ही रखी जानी चाहिए ताकि सबकी कल्पनाएँ साकार हो सकें।

रचना March 7, 2009 1:55 PM  

चलो कुश तुमने होली पर याद तो रखा शिव मिश्र जी ने तो गुजिया गोष्ठी से अलग ही कर दिया .

होली या फागुन
लाये बस हँसी ठिठोली
अबीर गुलाल से रंग जाये
सबके मन और तन
दूर हो कालिमा आतंक कि
होली के रंगों से
बस यही हैं कामना
मेरे मन की

Udan Tashtari March 7, 2009 2:28 PM  

सुन्दर अभिव्यक्ति///हा हा!!

बेहतरीन होरियाये भई..अनूप द नॉटी बेबी..नागिन नाचते कैसे लग रहे होंगे-चित्र दिमाग में खींच कर मुस्करा रहा हूँ.

सही मनवा दिये होली...होली की शुभकामनायें

Shiv Kumar Mishra March 7, 2009 3:37 PM  

गजब कर दिया भाई... जाने कितने वर्षों बाद इतनी बढ़िया होली खेली हमने. बहुत मज़ा आया. ये रंग तो छुड़ाने का दिल नहीं कर रहा.

होली की ढेर सारी शुभकानाएं.

लवली कुमारी / Lovely kumari March 7, 2009 4:27 PM  

सुखी ब्लॉग परिवार का अच्छा चित्र ...हमारी और से भी होली की बहुत शुभकामनायें.

संगीता पुरी March 7, 2009 4:42 PM  

बहुत बढिया पोस्‍ट लिखी आपने .... बहुत दिन बाद होली इतनी अच्‍छी तरह मनाया ... ये रंग काफी दिनों तक उतरेगा भी नहीं .... आप सभी को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाये।

mamta March 7, 2009 4:48 PM  

आपकी सोच की दाद देनी पड़ेगी ।
इसे पढ़ते-पढ़ते मेरा तो हंस-हंस कर बुरा हाल हो गया ।
कुश इतनी रंगीली होली और इतने लोगों के साथ खेल कर मजा आ गया ।
शुक्रिया !

मीनाक्षी March 7, 2009 5:10 PM  

कुश,,,सालों बाद ऐसी यादगार होली खेली जो भुलाए ना भूलेगी...
ज्ञानजी से पूरी तरह से सहमत.... कविताजी का सुझाव भी बढिया है..कल्पना सच हो तो कैसा हो.... :) फिलहाल होली की ढेरों शुभकामनाएँ

मुसाफिर जाट March 7, 2009 5:18 PM  

अरे कुश जी, मैं तो अपना नाम ढूंढता ही रह गया. असल में उस गैंग में मैं भी तो था. लेकिन मेरी शक्ल ही ऐसी हो गयी थी कि आप पहचान ही नहीं सके. चलो यही तो होली के मजे हैं

अनिल कान्त : March 7, 2009 5:31 PM  

ब्लोगरों की होली देख तो मज़ा आ गया .......भाई वाह
होली की ढेर सारी शुभकामनाएं

lalloo March 7, 2009 5:34 PM  

मदमत्ता घूमें लिये, इन्द्रधनुष कौ रंग
पै ब्लागी हुरियान पै, छायौ कुश कौ रंग

Arvind Mishra March 7, 2009 5:52 PM  

हो हो हो ...कैसी होली खेली है तुने कुश कि दिल हो गया है वाकई खुश ! घर par खूब hulaad के साथ होली मने -रंग बिरंगी शुभकामनाएं !

cmpershad March 7, 2009 6:05 PM  

बढिया होली हो ली। पर यह क्या कि बात गुझिया से पकोडे पर आ गई:)

अल्पना वर्मा March 7, 2009 6:50 PM  

bahut khuub! yah bhi nirala dhang dekha holi ka!

badiya imagination hai...

mast mast jabardast!!!!!!!
Holi mubarak ho aap ko bhi!

डॉ .अनुराग March 7, 2009 7:49 PM  

क्या कहे भैय्ये ...राजकपूर की तरह तुमने एक टब नहीं बनाया ...सबसे बढ़िया तो वही तरीका था ...खैर ठंडाई मस्त थी ..पेक करवा के ले आते ....अच्छा हाँ आते वक़्त पी डी भैंस से गिरे पड़े थे .....हम बताना भूल गए ....देखना घर पहुँच गए की नहीं .

पंगेबाज March 7, 2009 8:34 PM  

सही है . :) जमाय रखिये . उर्जा बचाये रखिये .किसी को भागने मत देना. हम भांग लेकर आते है :)

सुशील कुमार छौक्कर March 7, 2009 9:18 PM  

वाह कुश भाई क्या गजब की पोस्ट लिख डाली है होली पर,सभी साथियों के साथ। दिल खुश हो गया। काश कि ये कल्पना किसी दिन सच हो जाए। आपको सपरिवार होली की रंगो से भरी बधाई।

ताऊ रामपुरिया March 7, 2009 9:25 PM  

भाई पोस्ट पढ कर बिना पिये ही भंग भवानी का असर माथे पर चढना शुरु होगया. ताऊ की तरफ़ से इस पोस्ट को "post of the year" का अवार्ड दिया जाता है.

शायद एक दिन यह भी संभव होगा कि हम ऐसी होली भी मना पायेंगे. हम तो आशावान हैं. आपको और आपके इष्ट मित्रों को सभी बलागर ब्लाग्ररणीयों को होली की घणी रामराम.

रामराम.

Syed March 7, 2009 9:52 PM  

अरे वाह कुश भाई, इस पोस्ट पर तो आज ही नज़र पड़ी. बहुत ही बढ़िया...

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` March 7, 2009 11:31 PM  

कुश जी तथा सभी हिन्दी ब्लोग जगत के साथियोँ को होली पर्व पर रँगभरी शुभकामनाएँ
सच मानिये,लतादी व अमित भैया के सँग होली खेलने का इत्ता मज़ा नहीँ आया जितना
आप सबी के साथ आया !!
कुश , तुम्हेँ गुलाल का टीका लगाने के बाद,तुम्हारे , कान खीँचूँगी :)...खूब हँसी आई भई ...
सभी को नाचता हुआ वीज़ुअलाइज़ करके ...
खुश रहो...हमेशा हँसो और हँसाते रहो !!
स स्नेह,
लावण्या

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi March 8, 2009 12:09 AM  

आनंद आ गया यह मानसिक होली खेल कर। इस होली के फोटो सोटो भी होती तो मजा आ जाता। वास्तव में इस होली पर एक शानदार फोटोग्राफर भी हमारे साथ थे। लगता है। आप की रिपोर्ट पहले आ गई और फोटो अभी प्रोसेस ही हो रहे हैं।

अरे, फोटो ग्राफर साहब! आप का कैमरा कहाँ रह गया। आप फोटो बनाने में ही रह गया समाचार पहले छप गया। जरा अपने फोटो की नुमाइश भी कर डालो।

राज भाटिय़ा March 8, 2009 3:07 AM  

अरे हम तो ठंडाई ही घोटते रह गये, ओर सब को पिलाते रह गये, अब तो सभी रंग भी खत्म हो गये....
चलो हमारी तरफ़ से...


आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी भीगी भीगी बधाई।
बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

अनूप शुक्ल March 8, 2009 7:31 AM  

हम तो सबकी फ़ोटो बना रहे हैं अभी मन में। मौज आ रही है सोच-सोच के!

रश्मि प्रभा March 8, 2009 7:24 PM  

इस रंग में हम कहाँ हैं? पर जो भी हैं,मस्त हैं.......रंग से सराबोर,
होली की शुभकामनायें

डा० अमर कुमार March 8, 2009 7:59 PM  


मेरा एक लघु एतराज़ दर्ज़ किया जाय..

" पहले होली तो मना ले.. इतना बोलके सबने एक एक करके डा साहब को रंग लगाया.. "
और असली गऊ ब्राँड डाकटर साहब ने रंग लगवा भी लिया !
यह तो दुनिया का नौवाँ आश्चर्य है..

अब यह रही टिप्पणी

बोल पड़े ताऊ : रै डाक्टर, आठवाँ आश्चर्य कोण सै, भई !
सो ठिठक गया मैं : ऎ ताऊ, शिनाख़्त भी ना कर सकता, जरा पैचान कौण.. ?
टपक पड़ीं सीमा गुप्ता जी : इस तरिंयों ना बोल ताऊ.. मेरे को तो तू ही लाग्यै :)

Tarun March 9, 2009 7:05 AM  

अरे वाह, सारे ब्लोगर यहाँ होली खेल रहे हैं। बहुत अच्छी होली मना ली। कुश होली की बहुत बहुत शुभकामनायें।

रंजना March 10, 2009 3:35 PM  

वाह...बढ़िया रंग जमाया होली का.....

होली मुबारक !

सुनीता शानू March 10, 2009 7:15 PM  

होली मुबारक हो.....

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर March 11, 2009 4:46 PM  

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर
होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

ताऊ रामपुरिया March 11, 2009 5:01 PM  

होली की आपको एवम परिवार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.

pallavi trivedi March 11, 2009 6:13 PM  

कुश...वो होली खेलने के चक्कर में मेरी पिचकारी कहीं छूट गयी!जरा सबसे पूछ लेना किसी के पास तो नहीं चली गयी!शायद ठंडाई ज्यादा हो गयी थी!

Science Bloggers Association March 12, 2009 1:10 PM  

होली का तो आनन्‍द ही कुछ और है।

हार्दिक शुभकामनाऍं।

कुश March 12, 2009 5:04 PM  

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.. कृपया अपना आशीर्वाद यू ही बनाए रखे.. होली क़ी बहुत बहुत शुभकामनाए..

योगेन्द्र मौदगिल March 12, 2009 10:11 PM  

इतनी ठंडाई... वाह मेरे भाई.... अब पता लगा कि अब तक होश क्यों नहीं आई.... बहरहाल.. होली बंपर मुबारक...

अभिषेक ओझा March 18, 2009 2:25 PM  

इस रंग भरी होली के बाद हमारे इन्टरनेट को ठंढ लग गयी :( अब जाके किसी तरह थोडा सुग बुगाया है.

देर से ही सही... होली मुबारक :-)

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वो बात कह ही दी जानी चाहिए कि जिसका कहा जाना मुकरर्र है..

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जयपुर, राजस्थान, India
खुद को ढूँढने की कोशिश में कितने ही थानों पर अपनी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुका हूँ.. भूली हुई याददाश्त साथ लेकर जितना जिया जा सकता है उस से थोडा सा ज्यादा जी रहा हूँ.. ईश्वर की बनायीं दुनिया से अभी तक विश्वास उठा नहीं है.. इसलिए अभी तक यही पड़ा हूँ.. बर्दाश्त की हद से थोडा ज्यादा बर्दाश्त कर लेता हूँ.. गुलज़ार को समझने की कोशिश जारी है.. अनुराग जैसा सिनेमा बना लु तो कुछ सुकून मिले.. दोस्तों की फेहरिस्त लम्बी है.. पसंदीदा फिल्मो की फेहरिस्त लम्बी है, क्या कहूँ साला यहाँ ख्वाहिशो की फेहरिस्त लम्बी है.. यहाँ वहां जब कही कुछ बात नहीं बनी तो ब्लॉग बना लिया..देखते है इस से अब कब तक बनती है..

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