Monday, October 31, 2011

कहानी के इस भाग के प्रायोजक कौन है ?

मैं कहानी में पूरी तरह से डूबा हुआ था.. या यू कह लीजिये कि मुझे तैरना आता ही नहीं था.. एक छोटे से लकड़ी के तख्ते से लटका हुआ मैं आधा डूबा और आधा बचा हुआ सा लग रहा था.. लग क्या रहा था मैं बचा हुआ ही था.. कहानी में एक किरदार था जो मुझे भड़के हुए सांड सा लगा. ऐसा लगा जैसे अभी नाक से थू थू करता आएगा और अपने सींग मेरे पेट में घुसा देगा.. पर फिर मुझे गब्बर सिंह का वो वाला डायलोग याद आया जो अक्सर ऐसी सिचुएशन में याद आ ही जाता है कि जो डर गया समझो मर गया.. तो बस तभी गब्बर की एडवाईस फोलो करते हुए मैंने रिमोट को ठीक वैसे ही अनदेखा कर दिया जैसे कि प्रगति ने इस देश को.. 


फिर सांड जैसे कैरेक्टर ने कोई डायलोग मारा.. और कहानी की नायिका कान पे हाथ रख के चीख पड़ी.. वो रो तो रही थी पर उसके आंसु नहीं निकल रहे थे.. मुझे याद आया कि देश की विकास दर भी होती तो है मगर दिखती नहीं.. दिमाग माना नहीं पर दिल ने कहा जाने दो.. तो मैंने भी जाने दिया.. अगले सीन में बैकग्राउंड म्यूजिक टॉप पे था.. ये वाला म्यूजिक हर बार ऐसे सीन में आ ही जाता था.. पता नहीं कौन पीछे बैठा बैठा बजाता था..

सीन चेंज 
क्योंकि परिवर्तन इस द ब्लडी रुल ऑफ़ दिस संसार तो सीन भी चेंज हो जाता है.. इस सीन में ढाई सौ किलो की ज्वेलरी पहनी आंटी मत कहो ना टाईप आंटी की एंट्री होती है.. कैमरा चार बार बिना मकसद देश के युवाओ की तरह इधर उधर होता है.. आंटी डायलोग मारती है "अब देखती हु इस घर में किस की चलती है ?" ये बोलके वो चश्मा पहनती है.. मुझे लगा नज़र का होगा पर वो कोई रे बैन वे बैन टाईप का होता है.. चश्मा पहनते ही उसको सामने नज़र आता है बजाज.. अरे नहीं नहीं स्कूटर नहीं..... कैरक्टर, वैसे दोनों के एंड में टर देखकर मैं भी आप ही की तरह कन्फ्यूज हो गया था पर आपकी तरह मैं दुसरो के भरोसे नहीं रहा.. मैंने खुद ने आईडिया लगा लिया कि ये कैरेक्टर है..   वैसे भी फिल्मो और सीरियल्स में ये ही लोग भरे पड़े है.. बजाज, सिंघानिया, कपूर...... पता नहीं कौनसे कोटे के अंडर में घुसे हुए है... 

एनी वे 
बजाज की प्लास्टिक सर्जरी हो चुकी थी चेहरा बदल चुका था फिर भी सबने पहचान लिया... ये चौथा बजाज था जो हर बार अपने चौथे पे प्लास्टिक सर्जरी करवा के वापस आ जाता.. इसकी बीवी ने इस चक्कर में कई चूडिया भी फ़ोकट में तोड़ डाली... इधर वो चूड़िया तोडती की उधर वो वापस आ जाता.. अब तो मेरे भी ये समझ आने लग गया था कि रद्दी वाला अखबार तौलते तौलते क्यों पूछता रहता है कि भाईसाहब प्लास्टिक व्लास्टिक भी हो तो दे दो.. खैर बजाज आ तो गया था पर उसके आते ही एपिसोड ख़त्म हो गया.. नेक्स्ट एपिसोड में क्या दिखाया जाएगा वो बताया जा रहा था..ना चाहते हुए भी मैंने देखा कि अगले एपिसोड में क्या होगा.. पर जो दिखाया उन्होंने वो ना दिखाने के बराबर ही था.. 

फायनली 
रिमोट को पिस्तौल की तरह पकड़कर में टी वी के सामने तान चुका था.. अगर इसमें गोली होती तो मैं चला ही देता.. पर अच्छा हुआ कि गोली नहीं थी... क्योंकि टी वी की किश्ते भी अभी पूरी नहीं हुई है.. ऐसे में जज्बाती होना ठीक नहीं.. बस यही सोच के मैंने चैनल बदल दिया.. अब यहाँ एक सज्जन है जो बुरी नज़र से बचाने का तावीज़ बेच रहे है.. अगले चैनल पे सर पे बाल उगाने का तेल बेचा जा रहा है.. उस से अगले पे कोई श्री यंत्र है.. उस से अगले पे लोकेट.. ये क्या हो रहा है.. ये लोग थोडी देर पहले सीरियल्स दिखा रहे थे अचानक फूटपाथ पे सामान बेचने वालो जैसे लगने लगे है.. इनका कोई इमान धरम है या नहीं..

मुझे तो डाऊट हो रहा है कि मेरे ऑफिस के रास्ते में हिमालय की जड़ी बूटिया बेचने वाला भी किसी बड़ी कंपनी का डायरेक्टर होगा.. ऑफिस में ज़रूरी काम का बहाना मारके ज़रूर तिब्बती मार्केट में स्वेटर या शॉल बेचता होगा.. टी वी चैनल वाले पता नहीं क्या चाहते है.. जब मैं छोटा था तो टी वी ठीक करने के लिए छत पे चढके एंटीना हिलाता था.. मुझे नहीं पता था बाद में ये टी वी मेरी छाती पे चढ़के मेरे दिमाग का एंटीना हिलाएगा..... अब आप भी निकल लीजिये फटाफट..., पोस्ट ख़त्म हो चुकी है और मैं जा रहा हूँ टी वी ऑन करने वो क्या है ना कि बालिका वधु का रिपीट टेलीकास्ट शुरू होने वाला है.. कल रात देख नहीं पाया था.. लीजिये शुरू हो गया.. बता रहे है कि कहानी के इस भाग के प्रायोजक है...........

अब जाइये भी.. देखने भी ना दीजियेगा? 


37 comments:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    ReplyDelete
  3. सभी सीरिअल्स का यही हाल है ... सोचने पर विवश करती पोस्ट ..

    ReplyDelete
  4. kahani ke rasayan ka yogic mishran dekhne ke baad iske kai davedar nazar aaye....filhal....chandu-chorasiya ko iss aham
    kam pe laga rahe.....

    jai ho.

    ReplyDelete
  5. 'मुझे याद आया कि देश की विकास दर भी होती तो है मगर दिखती नहीं..'
    सहजता से बड़ी सटीक बात कही!

    ReplyDelete
  6. बहुत सार्थक आलेख !

    ReplyDelete
  7. टीवी सड़ियल देखना बड़ा गड्डमड्ड है। एक दिन मैने सरसरी निगाह से देख कर कहा कि यह औरत जरूर वैम्प होगी। पत्नीजी ने कहा कि मालुम न हो तो बीच में बोला मत करो। वह सीरियल की हीरोइन है।
    -----------
    अब इस पोस्ट के माध्यम से ज्ञानवर्धन हुआ। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  8. टी वी पर बेहतरीन तफ़सरा!...बच कर भागना चाहो (चैनल बदल कर) तो कहीं नहीं भाग सकते!!

    ReplyDelete
  9. ‘आंटी मत कहो ना टाईप आंटी ’ हो या बहन टाईप माँ, दिमाग की बत्ती तो गुल होनी ही है :)

    ReplyDelete
  10. रोचक ...टीवी सीरियल्स सच में कमाल हैं....

    ReplyDelete
  11. आजकल मैं भी कुछ उधर टहलने लगा हूँ। न्यूज चैनेलों के ब्रेक के दौरान।
    बहुत असली टाइप चित्र खींचा है आपने।

    ReplyDelete
  12. हम तो किसी ऐसे सीरियल का इंतजार कर रहे हैं जिसमें कोई ब्रेक न हो या फ़िर पूरे सीरियल के दौरान केवल एक मिनिट का ब्रेक हो ।

    ReplyDelete
  13. गोया आमद हो गयी तुम्हारी....जिंदगी रिमोट पे कित्ती निर्भर है ........नींद की गोली सा है .

    ReplyDelete
  14. बेहतरीन प्रस्‍तुति .........।

    ReplyDelete
  15. बेहतरीन प्रस्तुति... आभार!

    ReplyDelete
  16. क्या बताएं कुछ बेवकूफाना से धारावाहिक मुझे भी बेहद पसंद है , बहुत समय खा जाता है , कई बार सोचते हैं इतने में कुछ अच्छा पढ़ ही लिया होता , मगर इसे देखते हुए एकाग्रता की आवश्यकता नहीं होती , शायद इसलिए ही !

    ReplyDelete
  17. :) बहुत दिनों बाद कुछ पढ़ा ऐसा कि मुस्कान चिपकी रही होटों पर.

    ReplyDelete
  18. कुश सबसे पहले तो जनम दिन की ढेरों शुभकामनाएं स्वीकार करो और फिर उसके बाद अपने इस बेजोड़ लेखन के लिए भी. तुम लिखते नहीं हो कमाल करते हो...शब्द तुम्हारे इशारे पर नाचते नज़र आते हैं..ऐसा लेखन जिसे बार बार पढने को जी ललचाये बहुत मुश्किल से बल्कि यूँ कहूँ के किस्मत से आजकल नज़र आता है...गज़ब...बधाई स्वीकार लो भाई.

    नीरज

    ReplyDelete
  19. सिरीयल और टी वी ..सब टी आर पी का चक्कर ...विज्ञापन.. कमाई का ज़रिया बस..आज कल TV ke इतने सेलेब्रिटी/स्टार हो गए हैं ..जड़ी बूटी वाला भी छुपा रुस्तम निकले तो क्या आश्चर्य!

    ReplyDelete
  20. sab yun hi chal raha hai ..
    badiya saarthak prastuti..
    Janamdin kee haardik shubhkamnayen!

    ReplyDelete
  21. hahahh.pahli baar aai aapke blog par aur accha laga bahut accha.:)aapki is post ka prayojak koun hai?ye janne ka man ho raha hai:)bahut acchi post.thanks

    ReplyDelete
  22. हा हा हा कुछ नही बोलूंगी.कहोगे कितना बोलती है.हँसी नही रुक रही मेरी. एक फिल्म के दौरान ......नायिका- 'मैं माँ बनने वाली हूँ.'
    तभी विज्ञापन शुरू ...........इस सीन के प्रायोजक हैं .फलां....फलां...फलां ........... मैंने 'सीन' शब्द हटा दिया.हा हा हा सोरी मेरे भी दिमाग का एंटीना हिला दिया है तीवे और.....तुम्हारे इस पोस्ट ने हा हा हा प्रवाह है लिखने मे.पद्धति चली गई.सपने पूरे होंगे.गुलज़ार सी फिल्म बनाओगे...अनुराग जैसे डायरेक्टर मिलेंगे.मैं कहूँगी 'यह हमारे कुश की फिल्म है'

    ReplyDelete
  23. By the way,baal ugane ka tel wala ad koun sa tha?
    aajkal baal tezi se gir rahe hain.


    Well presented!!

    ReplyDelete
  24. I am following this blog for last 4 years..my name is also kush.

    ReplyDelete
  25. very nice..kush...ji khush kar dia...

    ReplyDelete
  26. http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/10/5.html

    ReplyDelete
  27. Join Best Online Jobs without any investment, Data Entry and Copy pasting Jobs.
    www.jobzcorner.com

    ReplyDelete

वो बात कह ही दी जानी चाहिए कि जिसका कहा जाना मुकरर्र है..