कुछ बातें दिल की दिल मैं ही रह जाती है ! कुछ दिल से बाहर निकलती है कविता बनकर.....
ये शब्द जो गिरते है कलम से..
समा जाते है काग़ज़ की आत्मा में......
....रहते है........... हमेशा वही बनकर के किसी की चाहत, और उन शब्दो के बीच मिलता है एक सूखा गुलाब....
ब्लॉग जगत में तुम उनके मानस पुत्र थे इस लिये तुम्हारा नुकसान मुझ से ज्यादा हैं लेकिन डॉ अमर की माता जी जीवित हैं उनके नुक्सान के आगे हम सब का नुक्सान कम हैं ईश्वर डॉ अमर की माता जी को इस नुक्सान को झेलने की शक्ति दे आज डॉ अनुराग भी बहुत ध्यान में रहे तुम्हारे बाद डॉ अमर से सबसे ज्यादा स्नेह उन्हे ही मिला हैं और तुम दोनों का मौन इस बात का सूचक हैं की इस नुक्सान की भरपाई संभव नहीं हैं बस डॉ अमर की माता जी का सोचो तकलीफ और दर्द कम लगेगा
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डॉ. अमर कुमार का जाना असामयिक और कष्टकारी है.वे अपने टीपने के अनूठे ढंग के लिए हमेशा याद किये जायेंगे.हाँ,बड़ी संख्या उन लोगों की है जो जीते जी उन्हें पहचान नहीं पाए. वे एक जिंदादिल और इंसानी-ब्लॉगर थे,जो इस रोबोट-जैसी 'वर्चुअल -दुनिया' में अलग तरह से हलचल मचाये रहते थे ! उनकी याद को सादर नमन !
पञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको और आपके कुटुंब को संपन्न व स्वस्थ रखें ! ***************************************************
"आइये प्रदुषण मुक्त दिवाली मनाएं, पटाखे ना चलायें"
:(
ReplyDeleteब्लॉग जगत में तुम उनके मानस पुत्र थे
ReplyDeleteइस लिये तुम्हारा नुकसान मुझ से ज्यादा हैं
लेकिन डॉ अमर की माता जी जीवित हैं उनके नुक्सान के आगे हम सब का नुक्सान कम हैं
ईश्वर डॉ अमर की माता जी को इस नुक्सान को झेलने की शक्ति दे
आज डॉ अनुराग भी बहुत ध्यान में रहे
तुम्हारे बाद डॉ अमर से सबसे ज्यादा स्नेह उन्हे ही मिला हैं
और तुम दोनों का मौन इस बात का सूचक हैं की इस नुक्सान की भरपाई संभव नहीं हैं
बस डॉ अमर की माता जी का सोचो तकलीफ और दर्द कम लगेगा
amar jee nahi aayenge :-(
ReplyDeleteईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें॥
ReplyDeleteबहुत दुखद पूर्ण समाचार
ReplyDelete:( काश..वहाँ से वापिसी हो पाती...
ReplyDeleteकहने को कुछ शब्द नहीं .. विनम्र श्रद्धांजलि !!
ReplyDeleteदोस्त ! हम लेट हो गये .....
ReplyDeleteइतना तो है कि अब लोग माडरेशन लगाते समय एक बार अमर जी को जरूर याद करेंगे.....उनकी बेबाक राय, तमाम बातें अब यादें ही बन कर रह गई हैं :(
ReplyDeleteविनम्र श्रद्धांजली।
:(
ReplyDeleteMy sincere condolences. Its sad and shocking...
ReplyDeleteअफ़सोस! अब वे कुछ ज्यादा ही दूर हो गये हैं। :(
ReplyDeleteडा.अमर कुमार को विनम्र श्रद्दांजलि!
सबसे अलग श्रद्धान्जलि।
ReplyDeleteहृदय द्रवित है।
ReplyDeleteउनकी टिप्पणिया याद आएँगी !
ReplyDeleteDukhad hai ham sabke liye ki ab we na aayengen :(
ReplyDeleteविनम्र श्रद्धांजली।
ReplyDelete.......................................
ReplyDelete!! विनम्र श्रद्धांजलि !!
ReplyDeleteईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें .......
ReplyDeleteआपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
ReplyDeleteकृपया पधारें
चर्चा मंच
Hi I really liked your blog.
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आगे से जब तक बहुत जरुरी ना हो कमेन्ट मोडरेशन मत रखियेगा. ये सचमुच गलत है. जुबान्बंदी गुनाह है साहब !
ReplyDeleteविल मिस डॉ. अमर.
अवाक् हूँ इस सूचना से .......... जानते सभी थे ऐसा कुछ होगा, पर इतनी जल्दी !
ReplyDeleteईश्वर अमर आत्मा को शरण में ले और संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करें !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे. विनम्र श्रृद्धांजलि!!
ReplyDeleteओह! सचमुच दुखद!!
ReplyDeleteडॉ. अमर कुमार का जाना असामयिक और कष्टकारी है.वे अपने टीपने के अनूठे ढंग के लिए हमेशा याद किये जायेंगे.हाँ,बड़ी संख्या उन लोगों की है जो जीते जी उन्हें पहचान नहीं पाए.
ReplyDeleteवे एक जिंदादिल और इंसानी-ब्लॉगर थे,जो इस रोबोट-जैसी 'वर्चुअल -दुनिया' में अलग तरह से हलचल मचाये रहते थे !
उनकी याद को सादर नमन !
कुश, यही जीवन है.... बस कुछ पल का साथ!सम्भालो स्वयं को.
ReplyDeleteघुघूतीबासूती
kya? Dr amar nahi rahe? kya kahen bahut dukh hua jaan kar
ReplyDeleteचर्चा में आज नई पुरानी हलचल
ReplyDeleteपञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको और आपके कुटुंब को संपन्न व स्वस्थ रखें !
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"आइये प्रदुषण मुक्त दिवाली मनाएं, पटाखे ना चलायें"
बहुत सुन्दर प्रस्तुति, बधाई.
ReplyDeleteकृपया मेरे ब्लॉग प् भी पधारने का कष्ट करें.