अ गर्ल एट क्वींस रोड़...

"अबे तुझे क्या पता... बाईक के पीछे लड़की बिठायी क्या तुने कभी,...? बार बार ब्रेक लगाने में जो मज़ा आता है वो तू क्या समझेगा प्यारे.. " आईने के सामने कंघी करते हुए वो बोला..

"तू तो साले कमीना का कमीना ही रहेगा.." उसका दोस्त हँसते हुए बोला.. "पर ये लडकिया रोज़ रोज़ कैसे मिल जाती है तुझे.. ?"

"अरे प्यारे ढूँढने से तो खुदा भी मिल जाता है.. वो क्वींस रोड पे फैक्ट्री है ना कपड़ो की.. वहां काम करने वाली लडकिया अक्सर रात को लिफ्ट ले ही लेती है.. बस अपना काम बन जाता है.. चल मैं निकलता हु ऑफिस के लिए आज की स्टोरी रात को आकर बताऊंगा.. "

"बाय!"
"बाय!"
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कहानी का मुख्य पात्र आज ऑफिस में देर तक रुका था.. घडी साढे दस बजा चुकी थी और वो सोच रहा था कि कही आज सारी लडकिया निकल नहीं जाए.. इतने में बॉस ने आकर उससे जाने के लिए कहा.. वो फ़ौरन हेलमेट उठाया और तेज़ कदमो से सीढिया उतर कर पार्किंग की ओर चला गया.. उसे जल्दी थी.. वैसे तो उसके ऑफिस से क्वींस रोड की दूरी करीब पांच दस मिनट थी पर वो और जल्दी जाना चाहता था.. फैक्ट्री के सामने वाले बस स्टैंड को खाली देखकर वो मायूस हो चुका था.. उसने रुक कर चारो तरफ नज़र दौडाई पर कोई लड़की नज़र नहीं आयी.. वो किक मारकर आगे बढ़ने लगा.. इतने में उसकी नज़र रोड लाईट के सहारे खडी लड़की पर पड़ी.. उसकी आँखों में एक चमक आ गयी.. वो बिना समय गवाए उस लड़की तक पहुंचा..

सफ़ेद सलवार कमीज और लाल दुपट्टा पहने खडी वो लड़की देखने में बहुत सुन्दर थी.. आँखों में गहरा काजल और माथे पर बड़ी लाल बिंदी.. कानो में बड़ी बड़ी बालिया और दोनों हाथो में एक दर्जन से भी ज्यादा चुडिया.. ऐसी लड़की उसने यहाँ पहले कभी नहीं देखी थी.. वो उसे देखता ही रह गया.. "हेल्लो" वो लड़की बोली.. सकपकाकर उसने बोला "जी..? इतनी रात गए यहाँ क्या कर रही है आप..?"

"मुझे लिंक रोड जाना है.. बहुत देर से वेट कर रही हूँ.. ना कोई बस मिल रही है ना ऑटो.. फिर रात भी काफी हो रही है.. "

"नो प्रोब्लम बैठो मैं छोड़ देता हूँ.. "
"लेकिन रात काफी हो गयी है और... "
"अरे डरिये मत मैं कुछ नहीं करूँगा.. वैसे भी मुझे लिंक रोड ही जाना है वहां से अपनी सिस्टर को लेकर घर जाऊँगा मैं.. "
"नहीं वो बात नहीं है.. पर "
"अरे मैडम आप यकीन करिए.. कुछ नहीं होगा वैसे भी यहाँ अकेले खड़े रहने में खतरा ज्यादा है.. और इस इलाके में सिर्फ फेक्ट्रिया है ज्यादा ट्रैफिक रहता नहीं है पता नहीं आपको ऑटो मिले ना मिले.. "

लड़की ने थोडा सोचकर हाँ कर दी.. वो मन ही मन खुश हो गया.. और जानबूझकर वो थोडा पीछे बैठ गया सीट पर जगह काफी कम बची थी.. लड़की सहमी हुई सी बैठ गयी.. अब वो मन ही मन खुश था.. गाडी बिलकुल धीरे धीरे चला रहा था.. साथ साथ लडकियों के रात को अकेले ना घूमने पर लेक्चर भी सुना रहा था.. वो लड़की चुपचाप बैठी सुन रही थी.. इस रस्ते को वो अच्छी तरह जानता था.. उसे पता था आगे स्पीड ब्रेकर आने वाला है.. उसने बाईक की रफ़्तार थोडी बढा दी... और स्पीड ब्रेकर के बिलकुल नजदीक जाकर जोर से ब्रेक लगाया.. अचानक झटका लगा.. लड़की का हाथ उसके कंधे पर आ गया.. वो रोमांचित हो उठा..

"आप ठीक तो है ना..! वो दरअसल स्पीड ब्रेकर नज़र नहीं आया था.. " वो बोला
"कोई बात नहीं.." लड़की धीरे से बोली..

उसने फिर से बाईक की रफ़्तार बढा ली थी.. और अपनी बाईक का रियर मिरर इस तरह से सेट करने लगा कि जिसमे पीछे बैठी लड़की का चेहरा साफ़ नज़र आये.. उसने देखा लड़की के चेहरे पर मुस्कान थी.. वो खुश हो गया. एक गढ्ढे के पास फिर से उसने ब्रेक लगाया.. और मिरर में देखा लड़की मुस्कुरा रही थी.. अब तो उसके मन की मुराद पुरी हो गयी थी.. वो पुरे रास्ते ब्रेक लगाता और मिरर में लड़की को मुस्कुराते हुए देखता.. मिरर में मुस्कुराता हुआ चेहरा देखकर वो खुश होता जा रहा था.. इतने में लड़की बोली..

"बस यही रोंक दीजिये.. "
"लेकिन लिंक रोड तो वो सामने की तरफ है.. "
"नहीं बस मुझे यही तक आना था वो पिछली गली में मेरा घर है मैं चली जाउंगी "
"तो मैं आपको घर तक छोड़ देता हूँ.. "
"नहीं नहीं उसकी कोई जरुरत नहीं.. आपने मेरी इतनी हेल्प की इसके लिए थैंक्स "
"अरे इसमें थैंक्स की क्या बात है... "
"अच्छा तो मैं चलती हु.. " और वो पलटकर जाने लगी..

"ज़रा सुनिए.. " वो बोला....... "आप फिर कब मिलेगी वहा..  "
"मिल जाउंगी.. चिंता मत करिए इतनी आसानी से आपका पीछा नहीं छोडूंगी.." वो हँसते हुए बोली..
"हाहाहा.. ज़रूर..!" वो भी हंस दिया और बाईक को स्टार्ट करके वापस जाने लगा..

रास्ते भर वो बार बार उस लड़की को याद कर रहा था.. कैसे ब्रेक लगते ही वो लड़की उससे चिपक सी जाती थी.. और जब उसने कंधे पर हाथ रखा था एक सरसराहट फ़ैल गयी थी जिस्म में.. इतनी खूबसूरत लड़की उसे पहले कभी नहीं मिली थी.. यही सोचते सोचते उसकी नज़र रियर मिरर पर पड़ी.. उसने देखा वही लड़की उसमे मुस्कुरा रही थी.. उसने अचानक ब्रेक लगाये.. पीछे देखा तो कोई नहीं था.. उसने मिरर में देखा तो वो लड़की नहीं थी.. वो मुस्कुराया.. ज़रूर कोई वहम होगा..

उसने गाडी स्टार्ट की थोडा आगे ही बढा था कि उसे फिर से आईने में वो नज़र आयी.. ठीक वैसे ही मुस्कुराते हुए.. उसने घबराकर गाडी रोकी और गौर से देखा तो वो लड़की नहीं थी.. उसने अपनी पीछे की सीट पर हाथ फिराकर देखा कुछ भी नहीं था.. सुनसान सड़क पर वो अकेला खड़ा था.. अब वो घबरा रहा था.. उसने बाईक स्टार्ट की और चलने लगा.. थोडी दूरी पर जाके उसने जैसे ही मिरर में देखा.. वो लड़की मुस्कुरा रही थी.. 

अब तो वो बुरी तरह से डर गया था.. वो समझ नहीं पाया ये क्या हो रहा है.. उसने बाईक को वापस उलटी तरफ घुमाया.. और तेज़ी से उसी तरफ चल पड़ा.. जहाँ से वो आया था.. पुरे रास्ते भर उसे मिरर में वो लड़की मुस्कुराते हुए नज़र आ रही थी.. उसकी आँखों से लगातार आंसु बह रहे थे.. वो घबरा चुका था... थोडी ही देर में वो फिर से क्वींस रोड पर आ चुका था.. उसकी साँसे बढ़ी हुई थी.. उसने वहा आकर जैसे ही गाडी रोकी उसका कलेजा काँप उठा.. उसका शरीर सुन्न हो गया..पूरा बदन पसीने में भीग उठा.. उसकी आँखों से खून बहने लगा.. और वो भक्क से जमीन पर गिर पड़ा... जिस लड़की को वो लिंक रोड पर छोड़ आया था वो अभी सड़क के दूसरी तरफ उसी रोड लाईट के सहारे खडी थी जहाँ से उसने लिफ्ट दी थी...


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जयपुर, राजस्थान, India
खुद को ढूँढने की कोशिश में कितने ही थानों पर अपनी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुका हूँ.. भूली हुई याददाश्त साथ लेकर जितना जिया जा सकता है उस से थोडा सा ज्यादा जी रहा हूँ.. ईश्वर की बनायीं दुनिया से अभी तक विश्वास उठा नहीं है.. इसलिए अभी तक यही पड़ा हूँ.. बर्दाश्त की हद से थोडा ज्यादा बर्दाश्त कर लेता हूँ.. गुलज़ार को समझने की कोशिश जारी है.. अनुराग जैसा सिनेमा बना लु तो कुछ सुकून मिले.. दोस्तों की फेहरिस्त लम्बी है.. पसंदीदा फिल्मो की फेहरिस्त लम्बी है, क्या कहूँ साला यहाँ ख्वाहिशो की फेहरिस्त लम्बी है.. यहाँ वहां जब कही कुछ बात नहीं बनी तो ब्लॉग बना लिया..देखते है इस से अब कब तक बनती है..

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