Wednesday, October 10, 2007

"छू लेते है लब तेरी आँख का पानी"

==============


छू लेते है लब तेरी आँख का पानी
जब शर्म से इनमे नमी आ जाती है

थाम लेते है कलाई बड़े यकीन के साथ
जब उमीदो की थोड़ी कमी आ जाती है

तुम जो साथ हो तो ज़िंदगी जन्नत है
वरना अक्सर इसमेें गमी आ जाती है


तमन्ना है पनाह मिल जाए तेरे क़दमो में
मगर वहा भी बेरहम ज़मी आ जाती है


===========

No comments:

Post a Comment

वो बात कह ही दी जानी चाहिए कि जिसका कहा जाना मुकरर्र है..