Monday, December 6, 2010

पिछले सन्डे ही तो पहला पिम्पल फूटा है..












पतले चक्कों वाली सायकिल
पर पैंडल मारते मारते
शहर के दुसरे कोने
में आ गए..
अब बस्ते रख दिए है
पेड़ से सटाकर..
और मोजो को
जूतों में खिसका दिया है..
कोहनी का तकिया बनाकर.
लेट गए है मिट्टी में
और देखते हुए
आसमान में
मुस्कुराकर कहते है.. कि साला
पी टी आई जो पकड़
लेता तो धुनाई बहुत होती..

कुछ देर सुस्ताकर
खोलते है टिफिन
मेथी के परांठो
की खुशबू लुटा देते
है आसमानों में..
अब एक टांग पे टांग
टिकाये गिनते है
अंटी के सिक्को को..
और खरीद के पतंग
चाँद तारो वाली
बस्ते से चरखी..
निकाल लेते है..

लम्बी तान पतंग को देके..
बस ऊपर ही तकते है..
कट जायेगी जब
दस पांच पतंगे..
झाड के पैंट को अपनी..
बस्ते में चरखी धर लेंगे..
सायकिल पे रख के बस्ता अपना
फिर से घर को चल लेंगे..

जो कहते है
ऐसा हाल रहा तो
आगे जाकर क्या करोगे?
उनकी हमको फ़िक्र नहीं
आफ्टर आल अभी
पिछले सन्डे ही तो पहला पिम्पल फूटा है..

Thursday, September 16, 2010

सोशल मिडिया मैरिज..


सीन 1 

- सुनो जी रश्मि अब बड़ी हो गयी है.. कल रात भर लैपटॉप पर बैठे बैठे ना जाने किससे चैटिंग कर रही थी.. मुझे लगता है अब इसकी शादी करवा देनी चाहिए..  
- ठीक है मैं आज ही शादी.कॉम पर उसकी प्रोफाईल बना देता हूँ..  
- अरे उसकी क्या जरुरत है..? वो अपनी फेसबुक वाली मिसेज शर्मा है ना.. उनके कोई ऑरकुट फ्रेंड का लड़का है.. फ्लिकर पर फोटो अल्बम देखा उसका.. देखने में तो बड़ा सुन्दर है.. ट्विटर पर एक हज़ार से ज्यादा फोलोवर है उसके.. और तो और खुद के डोमेन पर अपना ब्लॉग भी बना रखा है.. आप कहे तो बात करू उनसे.
- हूँ..! ठीक है पर पहले रश्मि से भी पूछ लेना.. 

सीन 2

- रश्मि बेटा क्या कर रही हो.. ?
- कुछ नहीं मोम बस अपने स्टेटस मेसेज्स के रिप्लाई दे रही थी.. 
- बेटा हमने तेरे लिए एक लड़का पसंद किया है..  बहुत अच्छा लड़का है.. उनकी मम्मी से मेरी चैट भी हुई थी.. मैंने तुम्हारा ऑरकुट प्रोफाईल का लिंक भी दे दिया उनको.. 
 - ओ मोम इतनी जल्दी क्या है. .? और वैसे भी बिना किसी को जाने पहचाने कैसे शादी कर लु..?
 - अरे तो मैंने कब मना किया है..  तुझे उसकी प्रोफाईल का लिंक मेल कर देती हूँ.. देख ले कैसा दिखता है.. कैसे दोस्त है उसके.. अच्छी कंपनी में काम करता है.. तुझे लिंक्ड इन का भी लिंक दे दूंगी.. तु एक बार देख तो सही.. 
 - ठीक है मोम.. 
सीन 3 

rash003 : hi
jatin.kumar1984 : hi 
do i know u?
rash003 : meri mom ne aapka
id diya tha 
jatin.kumar1984 : oh ha mummy ne 
bataya tha.. ms. sharma ki follower 
hai na aapki mom..
rash003 : ya 
wo chahte hai hamari shadi ho jaye
jatin.kumar1984 : not bad
kya karti ho tum?
ye mera linked in ka id hai..
it company mein hu 
jatin.kumar1984 : nice job! main bhi it 
company mein hu ye mera profile hai
rash003 : ha main dekh chuki hu..
profile is good.. but main chahti hu ki
hum face 2 face bhi mile ek baar
u know itna bada decision hai  
jatin.kumar1984 : i understand.. in fact
main bhi chahta tha face 2 face baat karna
rash003 : good to u have web cam?
jatin.kumar1984 : ya 1 sec.
rash003 : u have nice hair cut
jatin.kumar1984 : thanks! tumhara chashma 
to kool hai.. 

सीन 4

- ये देखो.. रश्मि ने ब्लशिंग वाला स्माईली भेजा है लगता है शरमा गयी अपनी शादी की बात सुनके.. 
- वो सब तो ठीक है लेकिन उसे लड़का पसंद है या नहीं ?
- हाँ है ना आप खुद ही देख लो फेसबुक पे खुद लाईक किया है उसने 
- हूँ.. ठीक है तो फिर गूगल में कोई अच्छा सा मुहूर्त सर्च करके शादी करवा देते है दोनों की.. 


- परसों शाम का मुहूर्त निकला है.. 
- अरे लेकिन ये तो बहुत जल्दी होगा.. नेट की स्पीड भी स्लो है सबको इनविटेशन कैसे भेजेंगे ?
- अरे इसमें क्या है कार्ड अपलोड करके सबको लिंक शेयर कर देंगे. इसमें कितना तो टाईम लगता है.. सब हो जायेगा  
- ठीक है फिर..शादी के मन्त्र की एम् पी थ्री डाउनलोड करलो नेट से.. फोटो अल्बम के लिए पिकासा ठीक रहेगा और वीडियो के लिए यू ट्यूब पर अकाउंट बना लेता हु.. 
- आज मेरे लिए बहुत ख़ुशी का दिन है मैं अभी अपना स्टेटस अपडेट करती हु..  


सीन 5
जतिन और रश्मि ने अपना स्टेटस चेंज किया  

jatin is married now
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rashmi is married now
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सीन 6

- क्या कर रही हो रश्मि डार्लिंग?
- अरे स्पीड बहुत स्लो है जतिन सबने बधाईया ई ग्रीटिंग्स से भेजी है ना फ्लैश में है देर लग रही है खुलने में.. 
- कम ऑन रश्मि तुम्हारे पास मेरे लिए तो वक़्त ही नहीं है.. मैं कबसे तुम्हे पिंग कर रहा हूँ और तुम हो कि.. पता नहीं कहा बिजी हो..
- सोरी हनी डीसी हो गया था.. प्लीज डोंट माईंड..  

सीन 7

जतिन और रश्मि को हैप्पी वेडिंग एल्बम में टैग किया गया 
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Wednesday, September 8, 2010

सड़क पर औंधे मुंह पड़ा शहर..

सुना भी तो जा सकता है..


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शहर का गिरेबान पकड़ कर जैसे किसी ने उसे नीचे गिरा दिया हो.. सड़क पर औंधे मुंह पड़ा हुआ है.. सड़क पर ही पड़ी खाली शराब की बोतले.. एक दुसरे से टकरा टकराकर सन्नाटे को तोड़ने की कोशिशे कर रही है.. उनमे बची थोडी बहुत शराब नालियों में बहती जा रही है.. सिगरेट के कुछ बुझे पड़े ठूंठ रात की चिंगारियों से अभी तक खुद को अलग नहीं कर पाए है.. कुत्ते.. कुत्तो की तरह फूटपाथ पे लेटे हुए है.. और इन सब पे नज़र रखता लैम्पोस्ट बिना हिले अपनी जगह पर खड़ा खड़ा चुपचाप सबकुछ देखता जा रहा है..

तेज़ी से भागती गाडियों के चक्के सड़क की छाती पर निशान छोड़ गए है.. हवा निकल कर फुस्स हो चुके गुब्बारे सड़क के कोनो में बिखरे हुए है.. दो चार पतंगे बिजली के तारो में उलझी हुई है.. दीवारों पर लिखा दिल्ली चलो अब कुछ साफ़ नहीं दिखता.. सड़क पर जमा कचरे में चूहे मुंह मार रहे है..

दूर कही से रेडियो के गाने की आवाज़ आयी है.. ऊंची हील वाली एक सैंडल सड़क पर पड़ी है.. थोडी ही दूरी पर दूसरी सैंडल, आगे चलकर लेडिज पर्स और उसके आगे घुप्प अँधेरा.. लोग अभी तक सो रहे है.. सूरज थोडी देर में निकलेगा निकल ही आएगा.. अखबार से भरा हुआ ट्रक सड़क से गुज़रा है.. फूटपाथ पे लेटे आदमी की टांग से इंच भर के फासले से.. चमेली के पत्तो की महक सहमी सहमी सी सड़क तक आ रही है..

मंदिर में घंटीया बज रही है.. दरगाह से अजान की आवाज़ भी आ रही है.. कुत्ते भोंकते हुए भाग रहे है.. अखबार वाला सायकिल की घंटी बजाता हुआ निकला है... नीम के पेड़ पे बैठी चिड़ियाओ की आवाज़े आ रही है.. कुलमिलाकर अब कह सकते है कि सुबह हो रही है.. ये दिन गुजरेगा.. बीतेगा.. बीत ही जाएगा... फिर शाम होगी, रात होगी और सुबह होगी.. सब कुछ युही चलेगा... चलता ही है.. चलता ही जाएगा..

Monday, August 30, 2010

ज़िन्दगी के सबसे मुश्किल पलो में प्यार मिठास घोल देता है..


'अभी इतनी बूढी भी नहीं हुई हूँ कि तु कुछ भी कहे और मान लु मैं.. इस डिब्बे से कैसे हो जायेगी बात तेरे नानाजी से..?' बोलते हुए नानीजी अपनी दवाइयों वाली थैली में से दवाई निकालने लगी..
अरे आप तो बस देखती जाओ.. शाम को तैयार रहना मैं नानाजी के पास जाकर फोन करूँगा.. आप उठा लेना..

सत्तर की उम्र में भी एकदम चुस्त नानाजी एक दिन चलते चलते सड़क पर गिर पड़े.. आसपास वाले लोगो ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया.. बस तबसे वही है.. नानीजी ने तो तीन साल पहले ही बिस्तर से ऐसी दोस्ती गांठी कि फिर बिस्तर छोड़ने का सवाल ही नहीं उठा.. हर रोज़ नानाजी को याद करती रहती बस.. जैसे ही कोई अस्पताल जाकर आता उस से बस नानाजी के बारे में ही पूछती.. ठीक तो है ? कब वापस आयेंगे ?

जब भी घर के दरवाजे पर कोई आवाज़ होती है.. उन्हें लगता नानाजी आ गए.. जब मैं नानीजी के पास पंहुचा तो वो बोली 'क्यों रे तेरे नानाजी मेरे बारे में पूछते नहीं है.. ?'
'पूछते है ना' मैंने कहा..
'अच्छा क्या बोलते है ?' नानी जी आँखों में चमक लिए हुए बोली..

'बोलते है तेरी नानी तो मुझे भूल ही गयी है.. सब मिलने आते है वो ही नहीं आती.. '
'झूट..!' नानी बोली 'ऐसा तो हो ही नहीं सकता...  वो तो अब पांव उठते नहीं है वरना तो चली ही जाती.. पता नहीं कैसे होंगे वो? '
'अच्छे है नानी.. आप क्यों चिंता करती हो.. '
'लल्ला मेरा एक काम करेगा..' नानी बड़े प्यार से बोली
'हाँ कहो ना नानी.. '
'तु एक चिट्ठी लिख देगा उनके लिए.. जैसा मैं कहती हूँ बस वैसे.. '
'अरे वाह लव लैटर.. क्या बात है नानी.. '
'चुपकर बेसरम..! बस किसी को बताना नहीं.. '
ठीक है नानी बताओ क्या लिखना है..

छुटकी के पापा,
आप मेरे लिए उस दिन इमली लाने गए थे ना फिर अभी तक वापस क्यों नहीं आये..? बच्चो से पूछती हूँ तो कहते है पापा ठीक है.. पर मुझे लगता है कुछ ठीक नहीं.. जब आप पास नहीं होते हो तो कुछ ठीक क्यों नहीं लगता..? रोज़ शाम को सोचती हूँ आप आज आ जाओगे पर आप नहीं आते हों..  मेरा यहाँ अकेले मन नहीं लगता.. बस बैठी बैठी आपकी आराम कुर्सी को देखती रहती हूँ.. कभी खिड़की से हवा आ जाये तो इसे हिलती देखती रहती हूँ आप अखबार पढ़ते हुए ऐसे ही तो बैठते है इस पर..  और तो और कौनसी दवाई कब लेनी है कुछ पता नहीं चलता.. रोज़ खिड़की पर गाय आकर खडी हो जाती है वो अलग.. मुझसे तो उठकर रोटी दी नहीं जाती.. कल छोटा गया था उसको रोटी देने पर खायी ही नहीं.. आप आओगे तभी खाएगी.. और हाँ वो टेबल पर पड़ा कैलेण्डर भी नहीं बदला है किसी ने.. जिस तारीख को आप गए थे अभी भी वैसी की वैसी है.. बाहर ठण्ड भी पड़ने लग गयी अब तो.. आप जर्सी नहीं ले गए थे मैं लल्ला के साथ भिजवा दूंगी.. और कान खुले मत रखना आपको सर्दी जल्दी लग जाती है.. मेरी चिंता मत करना आप मैं यहाँ बिलकुल ठीक हूँ.. बस आप जल्दी से आ जाओ..

मैं पैन चलाते चलाते रुक कर नानी को देखने लगा.. आँखे कब भीग आयी पता ही नहीं चला.. नानी बोले जा रही थी बस.. मैं उन्हें देख रहा था..

क्या हुआ लल्ला ? लिखा कि नहीं? नानी ने मेरी ओर देखा..
'लिख दिया नानी..' मैंने नानी की हिदायतों के साथ उस चिट्ठी को जेब में डाला.. और नानी की दी हुई जर्सी ली..  

नानाजी.. कुछ बोलते नहीं थे.. पर हाँ सुन जरुर सकते थे.. मैंने मौका देखकर नानी जी वाली बात कही.. उन्होंने मेरी तरफ देखा.. कुछ बोलने की कोशिश की पर बोल नहीं पाए.. मैंने चिट्ठी निकालकर पढना शुरू किया.. नानाजी के हाथो में हलचल देखी.. ज्योंही चिट्ठी ख़त्म हुई नानाजी की आँख से एक आंसू गिर कर उनके गालो पर आ गया.. नानाजी ने हाथ उठाकर मुझे बुलाया.. मेरे पास जाते ही उन्होंने अपना हाथ मेरे सर पर रख दिया.. उस शाम मैं और नानाजी बहुत रोये..

मैं जानता था नानीजी को आज सारी रात नींद नहीं आयी होगी.. सुबह जब पहुंचा तो नानीजी बिस्तर पर बैठी अपनी दवाइयों से उलझ रही थी.. मेरे जाते ही उन्होंने पुछा क्यों लल्ला पढ़ा उन्होंने क्या कहा ? कब आ रहे है ?

जब नानीजी को बताया तो वो बहुत खुश हुई.. अब तो ये रोज़ का सिलसिला बन गया..
 मैं हर रोज़ नानीजी का लैटर लेकर अस्पताल जाता.. और नानाजी को पढ़कर सुनाता.. धीरे धीरे नानाजी बोलने भी लग गए थे..

एक दिन मैं अपने दोस्त से मोबाईल लेकर आया..

अभी इतनी बूढी भी नहीं हुई हूँ कि तु कुछ भी कहे और मान लु मैं.. इस डिब्बे से कैसे हो जायेगी बात तेरे नानाजी से.. बोलते हुए नानीजी अपनी दवाइयों वाले थैली में से दवाई निकालने लगी..
अरे आप तो बस देखती जाओ.. शाम को तैयार रहना मैं नानाजी के पास जाकर फोन करूँगा.. आप उठा लेना..

उस दिन मैं नानीजी के पास लैंडलाईन फोन रखकर गया और नानाजी  के पास जाकर मोबाईल से बात करवाई.. 'हल्लो हल्लो' नानाजी से जोर से बोल रहे थे.. शायद नानीजी को अब भी यकीन नहीं था.. कि वो नानाजी से बात कर रही थी..

'मुझे कहाँ कुछ हुआ है..' नानाजी बोल रहे थे..
'वो तो तु दिन भर परेशान करती रहती है,, इसलिए कुछ दिनों के लिए यहाँ चला आया.. थोड़े दिन तो आराम से रहूँगा यहाँ.. और तुझे कहाँ मेरी फ़िक्र है तुझे तो तेरी इमली की चिंता है..  इमली भी पड़ी है मेरे पास.. लल्ला के हाथ नहीं भेजूंगा.. खुद लेकर आऊंगा नहीं तो तू नाराज हो जाएगी.. और तु मेरी चिंता मत करना.. मैं यहाँ अच्छा हूँ.. बस दिन भर तेरी आवाज़ नहीं आती.. तु वो गाना गाती थी ना.. "अभी ना जाओ छोड़कर..." वो बड़ा याद आता है..  मैं तो सीख ही नहीं पाया.. इस बार मुझे याद करा देना पूरा.. अकेले में गा लिया करूँगा.. अरे लल्ला सुनता है तो क्या हुआ...? और हाँ तेरी दवाई की पर्ची अलमारी में रखी है लल्ला को बोलके सब टाईम पर ले लेना.. नहीं तो फिर खांसती रहेगी रात भर और मुझे भी नहीं सोने देगी.. मैंने जर्सी पहन ली है.. अभी भी वैसी की वैसी है.. जैसी तुने पहली बार सिलाई की थी.. तेरी सारी चिट्ठिया मिली मुझे. क्या जरुरत थी इन सबकी? अभी भी बच्ची की बच्ची है तू तो.. हाँ हाँ अपना ख्याल रखूँगा..मेरी चिंता मत करना तू बस अपना ख्याल रखना.. मैं जल्दी आऊंगा घर फिर से तेरी किचकिच सुनने .. ' अब रखता हूँ.. ख्याल रखना..

अगली बहुत देर तक मैं नानाजी को देख रहा था.. वो कौनसी डोर होंगी जिसने नाना नानी को उम्र के इस दौर में भी बाँध रखा है.. ज़िन्दगी के सबसे मुश्किल पलो में प्यार कैसी मिठास घोल देता है कि हम सब दर्द भूल जाते है.. नानी जी अपने सब दर्द भूलकर नानाजी को चिट्ठी लिखती है.. नानाजी साँसों से लड़ते हुए उनसे इस तरह बात करते है जैसे पहली बार बात कर रहे हो..  ज़िन्दगी के उस मोड़ पर जब दुनिया पीछे छूट जाती है.. तब प्यार ही दो रिश्तो में गर्माहट बरकरार रखता है..

दूसरी शाम जब मैं अस्पताल पहुंचा तो सब लोगो को नानाजी के आसपास खड़ा देखा.. नानाजी वादा तोड़कर जा चुके थे..

'लल्ला!...' नानी की आवाज़ ने चौंकाया..
नानाजी को गुज़रे हुए तीन हफ्ते बीत चुके थे.. नानीजी बिना कुछ बोले बस बिस्तर पर लेटी रहती थी.. आज जब मैं उनकी दवाईयो पर निशान लगा रहा था.. नानीजी बोली..
लल्ला... एक बात कहे.. ! तुम उस दिन वो लाये थे ना जिससे तुमने नानाजी से बात करायी थी..
'मोबाईल '
हाँ वही.. वो तो बड़ी अच्छी चीज थी.. उस से एक बार तेरे नानाजी से बात करा दे ना.. आज यहाँ मन नहीं लग रहा हमारा..

Thursday, August 19, 2010

खो जाने में जो मज़ा है वो पा जाने में कहाँ..?


आज थोडी देर के लिए सूरज को पीछे धकेल देते है.. गर्मी से हाल बुरा कर दिया ससुरे ने... चाँद को भी थोडा नीचे सरका देते है. साला धरती पे लाईट कम मारता है.. इन चिनार के पेडो की हाईट कम करनी पड़ेगी वरना लोग अमरुद समझ कर आसमान से तारे तोड़ लेंगे.. और बादल! बादलो का क्या करे..? पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लगा देता हूँ.. इधर उधर घुमते रहते है दिन भर.. इसी बहाने लोगो को ठिकाने लगाते रहेंगे.. वो पिकासो वाली पेंटिंग लाना यार.. मोनालिसा वाली... एक काम करते है उसको आसमान पे एक साईड में लगा देते है.. धरती घूमेगी तो पूरी दुनिया देख लेगी.. पेंटिंग वाले ब्रश और कुछ वाटर कलर ले आओ.. सारे बच्चो को हाथ में देकर बादलो पे बिठा दो.. आसमान में रंग भरते रहेंगे.. एक काम करो ना यार कोई बढ़िया सा मोगरे वाला परफ्यूम लाकर स्प्रे मार दो.. पूरी दुनिया में..

दो बड़े वाले स्कूप भर के हिमालय की बर्फ उठा लों और शरबत डालकर बरफ के गोले बाँट दो सबको... दुनिया में बहने वाली सारी हवा को थोडी देर के लिए डीप फ्रीज़र में रख दो.. ताकि ठंडी ठंडी हवा सबके गालो को लगे... दो लोग जाओ और दुनिया के सारे नींबू तोड़ के समंदर में मिला दो.. इस बार बारिश में सबको नींबू पानी पिलायेंगे.. वो इन्द्रधनुष उधर कहाँ लटक रहा है.. उसको यहाँ सेंटर में रखो.. और लाल वाला रंग थोडा झुका के नीचे रखो ताकि लडकिया उसमे ऊँगली डुबाकर लिपस्टिक लगा ले..

ज़मीन का एक टुकड़ा काटकर पतंग बना दो उसकी.. आसमान में पेंच लड़ायेंगे सब.. और रेगिस्तान की मिट्टी के खिलौने बनाकर बाँट दो बच्चो में.. बादलो में जमा बूंदों में गुलाब जल मिला दो.. महकती हुई बारिशे मिट्टी की खुशबू को और हसीन बना देगी...

खो जाने में जो मज़ा है वो पा जाने में कहाँ..?

...............

मेरी बात सुनके हँसना मत..
कि मैं दौड़ना चाहता हूँ तितलियों के पीछे
और बनाना चाहता हूँ..
समंदर के करीब रेत के टीले
और पकड़ के खरगोश को
दोनों हाथो में... अपने गालो को
गुदगुदाना चाहता हूँ..
मैं भीगना चाहता हूँ बारिश में
और छातो को जमा पानी में
उल्टा बहाना चाहता हूँ..
मैं भागना चाहता हूँ.. नंगे पांव
और बात करना चाहता हूँ  हर अजनबी चेहरे से
या देखकर उन्हें बिना बात के मुस्कुराना चाहता हूँ..
मैं ठोंक के कील इसकी
पीठ में.. ज़िन्दगी को जीना चाहता हूँ..