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Monday, September 15, 2008

मुसलमानों को बदनाम करने के लिए, हिंदू बम फोड़ रहे है

"इंडियन मुजाहिदीन एक हिंदू संगठन है जो मुसलमानों को बदनाम करने के लिए बम फोड़ रहा है"

जिन लोगो ने फ़िरदौस जी का ताज़ा लेख पढ़ा है उन्हे भी मेरी तरह उनपर दया ज़रूर आई होगी.. माफ़ कीजिएगा मैं इस तरह के लेख लिखता नही हू पर शायद ये हम लोगो की कमज़ोरी ही है की हम ये नही लिख पाते क्योंकि हम एक अच्छे समाज की कल्पना में जीते है और हर बार ये सोचकर की कही कोई ग़लत मतलब ना निकाल ले हम लिखते नही है..

मेरा भी यही विचार है मेरा किसी धर्म विशेष से कोई बैर नही है.. ना मैं हर मुसलमान को आतंकवादी कह रहा हू.. पर मैं उन मुसलमानो से मुखातिब हू जो हमे अपना भाई कहते हुए ऐसी पोस्ट लिखते है की मन खराब हो जाता है.. मैं एक हिन्दुस्तानी से ये अपेक्षा करता हू की वो अपने देश में होने वाले अत्याचारो पर दुखी हो और यदि ना भी हो तो कम से कम व्यर्थ बकवास ना करे.. और ये तो हरगिज़ नही चाहूँगा की वो देश की अस्मत लूटने वाले के पक्ष में ब्लॉग पर पोस्ट लिखे..

और ये तो हरगिज़ नही चाहूँगा की वो ये लिखे की "हिंदू, मुसलमानो के भेष में बम विस्फोट करते है, मुसलमानो को बदनाम करने के लिए.." इस पर गुस्सा तो नही लेकिन तरस ज़रूर आता है.. कुछ दिन पहले ये लिखा गया था की रक्षंदा महिला ना होकर पुरुष है.. तब भी बहुत दुख हुआ था की बिना तथ्यो के लोग ऐसी बाते कैसे करते है.. यहा भी वही बात..

दुख तो तब होता है जब पढ़े लिखे लोग इस तरह की बाते करते है.. फ़िरदौस जी का कहना है की "कानपुर में नकली दाढ़ी मूँछो के साथ पकड़े गये थे लोग.. महाराष्ट्र के एक नेता ने कहा की हिंदू आतंकवादी दस्ते बनाओ और उसके बाद अहमदाबाद में बम विस्फोट हुए.." गोया की उनका कहना है हिंदू संगठन ने इंडियन मुजाहिदीन के नींव रखी है.. और उसके उपरांत समस्त हिंदू मंदिरो के आगे बम रखे है.. और विस्फोट करके अपने ही देश को छलनी किया है.. इसका तो ये अर्थ होता है की जिनको पकड़ा है वो सब मुसलमान नही होकर हिंदू है..


पिछले शनिवार को मैं जोधपुर में था वहा चार मुसलमानो को पुलिस ने पकड़ा जिसका विरोध वहा पर मौजूद चार हज़ार मुसलमानो ने किया.. अगले दिन उन चार व्यक्तियो ने अपना गुनाह कबूल किया और आतंकवादियो को ठहराने की बात कबूल की.. वो चार हज़ार लोग दोबारा नज़र नही आ रहे है.. फिर्दोस जी के अनुसार वो चार लोग भी हिंदू ही होंगे. जो पिछले बीस वर्षो से मुसलमान बनकर मुस्लिम इलाक़े में रह रहे है.. और उनकी रक्षा में जो चार हज़ार लोग आए थे वो भी सब हिंदू ही रहे होंगे.. जो पिछले कई सालो से वहा रहते हुए मस्जिद में नमाज़ पढ़ते हुए लोगो को मुस्लिम होने का धोखा दे रहे है..


फिरदौस जी ने पाक धर्म ग्रंथ क़ुरान के कुछ अंश भी प्रस्तुत किए है जिसमे लिखा है की अमन से जीना चाहिए.. इसलिए मुसलमान आतंकवादी हो ही नही सकते क्योंकि उन्होने यक़ीनन क़ुरान पढ़ी होगी.. तो फिर्दोस जी आप ही बताइए की कौन से धर्म ग्रंथ में लिखा है की बम फोड़ने चाहिए.. जब धर्म ग्रंथ लिखे जा रहे थे तब ना कोई बम थे ना बंदूक और ना ही आतंकवाद, ये सब उसके बाद की बाते है..

"आपने लिखा है की जयपुर बम विस्फोट के बाद मुसलमानों ने वहा जाकर पीडितो की मदद की" जिन जयपुर धमाको में आप मुसलमानो की सहायता की बात कर रही है.. तो वो करके मुसलमानो ने कौनसा तीर मार लिया और हिन्दुओ ने भी या फिर किसी भी धर्म के लोगो ने कौनसा तीर मार लिया क्या घायलो की सेवा करना इंसानियत नही है.. वो तो सबको ही करनी चाहिए उसका एहसान क्यो जता रही है आप? क्या किसी हिंदू या अन्य धर्म के व्यक्ति ने लिखा की हमने वहा पर जाकर पीड़ितो की सहयता की?

जिन जयपुर बम धमाको की आप बात कर रही है मैने उस मंज़र को देखा है.. हमारा अपना शहर छलनी हुआ था. और आपकी जानकारी में इज़ाफा करते हुए मैं ये भी बता दू की कोटा का एक मौलवी भी इनमे सम्मिलित था जो मदरसे में पढाता भी था और शायद पाँच वक़्त का नमाज़ी भी रहा हो..

या फिर आपकी सोच के अनुसार वो एक हिंदू भी हो सकता है जो मुस्लिम भेष में रह रहा हो कदाचित् नकली दाढ़ी मूँछे लगाकर.. क्योंकि आपके अनुसार इंडिया मुजाहिद्दीन का असली मास्टर माइंड तो हिंदू ही है..

जयपुर में जिस मुसाफिर खाने में आतंकवादी रुके थे वो मुसलमानो द्वारा चलाया जाता है.. उस मुसाफिर खाने में हिंदू आतंकवादी जो मुसलमान के भेष में रह रहे थे उनकी सुरक्षा मुसलमानो ने ही की थी और बम फट जाने के बाद भी नही बताया की ये लोग यहा छूपे हुए थे.. शायद उन्हे इस बात का अनुमान नही था की ये हिंदू बम फोड़कर मुसलमानो को बदनाम करने की नीयत से यहा आए है..

ताज्जुब तो तब होता है जब एक ओर, जहा विस्फोट में लोग मर रहे है वहा सब लोग उनके बारे में लिख रहे है..वही पर आप जैसे लोग ये कहते फिर रहे है की सिमी को क्यो बदनाम किया जा रहा है.. तो मत कीजिए ना बदनाम पर हमसे मत कहिये..क्योंकि हमसे नही होगा, हमने वो मंज़र देखा है जयपुर में.. जब विस्फोट हुआ था..

मुझे लग रहा है की या तो आप सिमी के बारे में कुछ जानती नही है और या फिर सब जानते हुए भी नाटक कर रही है.. क्योंकि सिमी द्वारा अलीगढ से प्रकाशित होने वाली पत्रिका कभी पढ़ लीजिएगा जिसमे हिंदू के खिलाफ क्या लिखा गया है.. और जिस पर अब प्रतिबंध भी लग चुका है. मैने भी वो पत्रिका पढ़ी है. और गुस्सा भी आया था लेकिन इसका मतलब ये नही की मैं सभी मुसलमानो को गलिया देने लग जाऊ..

और आपका तो ये भी कहना हो सकता है की वो पत्रिका हिंदू छपवाते है और खुद को गालिया लिखकर मुसलमानो में बँटवाते है और फिर कहते है की मुसलमान ऐसा करते है.., जाकर पहले आँकड़े सॉफ करिए की पूरी दुनिया में आतंकवाद कौन फैला रहा है और किसके नाम पर फैला रहा है... मगर मैं आपकी तरह बेवकूफ़ नही हू की सभी मुसलमानो के खिलाफ झंडा लेकर खड़ा हो जाऊ जिस प्रकार आप खड़ी है हिन्दुओ के खिलाफ.. ज़रा गौर करके अपनी पिछली पोस्टो पर नज़र डालिए.. आपकी सारी पोस्ट में बाकायदा हिन्दुओ को किसी ना किसी विषय पर नसीहत दी गयी है..

आप खुद ही अपने दिल पर हाथ रख कर बताईएगा की आप विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और आर एस एस के बारे में क्या सोचती है.. आप क्या, मुसलमान जनसंख्या का एक तबका ही उनके बारे में क्या सोचता है.. सब इस से भली भाँति परिचित है..

खामख्वाह माहोल खराब मत करिए.. और ईश्वर के लिए इस प्रकार की पोस्ट मत लिखिए जब हम एक सभ्य समाज की कल्पना कर रहे है.. आज का युवा हिंदू मुस्लिम भेद भाव से कोसो दूर है.. मेरे मुस्लिम मित्रो का मेरे घर उसी प्रकार आना जाना है जैसे बाकी लोग आते है.. हमारे बीच इन विषयो पर कभी बात नही होती या विवाद नही होते ..

ये आप जैसे कुसोच वाले लोग है जो इस प्रकार की बातो से इन सबको और बढ़ावा दे रहे हा.. आप लोग तो उस महॉल में जी लिए पर मेरी प्रार्थना है की कम से कम अपने बच्चो को कभी ये अंतर मत बताइए की हिंदू अलग है और मुसलमान अलग..

यही मेरी आपसे विनती है...

Wednesday, May 14, 2008

धमाके से जयपुर हिला है मगर हारा नही..

13 मई 2008 की शाम को कोई भी जयपुर वासी शायद ही भूल पाएगा.. कल शाम जयपुर शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहे पर स्थित हनुमान मंदिर पर पूजा हो रही थी. मंगलवार होने के कारण दर्शनार्थी बड़ी संख्या में मौजूद थे.. आरती होने के बाद प्रसाद वितरण किया जा रहा था की एक जोरदार धमाके ने सबको हिला दिया.. लोगो ने बाहर जाकर देखा तो कुछ ऐसा मंज़र था जो जयपुर के लोगो ने कभी सपने में भी नही सोचा था.. हर तरफ खून और चीत्कार.. ये पहला आतंकी हमला था.. उसके बाद एक एक करके इस तरह के कुल आठ धमाके और हुए.. और देखते ही देखते गुलाबी नगरी लहुलुहान हो गयी.. जिस हनुमान मंदिर में ये विस्फोट हुआ था मैं हर मंगलवार को वहा जाता हू... पर कल शाम आधे रास्ते से पता नही क्या सोचकर घर लौट आया..सोचा थोड़ी देर बाद जाऊँगा.. घर आकर खाना खाने बैठा ही था की मेरी एक मित्र सई का फोन आया. सब कुछ ठीक तो है जयपुर में ब्लास्ट हुआ है... फ़ौरन टीवी ऑन किया तो देखा एक नही कुल पाँच विस्फोट हुए धीरे धीरे धमाको की संख्या बदती रही और करीब आधे घंटे में ये संख्या 9 हो गयी.. चारो तरफ दहशत का माहॉल.. घरवाले और मित्र फोन करने का प्रयास कर रहे थे.. पर मोबाइल नेटवर्क जाम हो चुका था.. रात 8.30 के करीब एक एक करके सारे रेडियो स्टेशन बंद हो गये.. बड़ी मुश्किल से फोन मिल रहा था.. सबसे पहले जोधपुर फोन लगाया घरवालो को खबर की मैं यहा सुरक्षित हू.. वो कब से फोन लगा रहे थे मिल नही रहा था.. मुझसे बात करके उन्हे थोड़ी तस्सली हुई..

सबके फोन आ रहे थे.. मैं बस यही कह रहा था की मैं ठीक हू.. मैं ठीक हू.. पर क्या वाकई.. शारीरिक रूप से तो नही पर हा जो मानसकिक क्षति हुई है वो कैसे ठीक होगी.. जयपुर मेरा अपना शहर है.. पिछले 3 सालो से यहा हू.. अपने आँगन को लहुलुहान देख कर मन विचलित हो गया.. बाहर जा नही पा रहे थे तो न्यूज़ चेनल पर देखते जा रहे थे.. पुराने शहर में रहने वाले दोस्तो से संपर्क करने की कोशिश की तो हो नही पा रहा था.. न्यूज़ चेनल पे लगातार ख़बरे आ रही थी.. करीब अस्सी लोगो के मरने और 150 से भी ज़्यादा लोगो के घायल होने की खबर मिली.. सुबह जब जौहरी बाज़ार में रहने वाले मित्र को फोन किया तो उसने बताया की वो तो कोटा में है पर उनकी माताजी और बहन धमाके के वक़्त जौहरी बाज़ार में ही थी.. और सड़क पार करने की कोशिश कर रही थी. की सामने बम विस्फोट हो गया.. बस तबसे उनकी भी हालत खराब है अपनी आँखो के सामने इस तरह का मंज़र देखकर कोई भी विचलित हो सकता है..

मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर के बाहर धमाको का होना इस बात का संकेत देता है की आतंकवादियो ने सांप्रदायिक दंगे फैलाने के मक़सद से किया था.. मगर जयपुर के जज़्बे ने उनके इन शैतानी मंसूबो पार पानी फेर दिया.. शहर के लोगो ने धर्म मज़हब सब भूलकर पीड़ितो की सहायता पुलिस से कंधे से कंधा मिलकर की.. धमाके के कुछ ही देर बाद कई सव्यमसेवी संगठन और जयपुर के लोग सहयता के लिए आगे आए.. जिन लोगो के परिजनो का पता नही लग रहा था जयपुर शहर के बाशिन्दो ने उन्हे अपना परिजन कह कर अस्पताल पहुँचाया.. मरीज़ की जात पात पूछे बिना उनकी सुश्रुषा में लगे रहे.. कोई किसी की ग्लूकोस की बॉटल पकड़े खड़ा था कोई पट्टी कर रहा था.. कोई कत्रिम स्वान्स दे रहा था..

राजस्थान वीरो की भूमि रहा है. यहा की माटी में ही शौर्य भरा हुआ है.. और एक बार फिर जयपुर के लोगो ने एक साथ होकर आतंकी संगठनो को दिखा दिया है की धमाको से हम हिले ज़रूर है पर हारे नही.. और राजस्थान की जड़े इतनी कमज़ोर नही की चन्द धमाको से डर जाए.. जयपुर के सभी मज़हब के लोगो ने एक साथ मिलकर जो काम किया है वो देशभर के लोगो के लिए एक मिसाल है.. अगर आतंकवाद का ख़ात्मा करना है तो एक जुट होना पड़ेगा.. आतंक फैलाने वाले लोग यही चाहते है की सांप्रदायिक दंगे हो इसीलिए पिछले साल राजस्थान के अजमेर जिले की प्रसिद्ध दरगाह में विस्फोट किया गया था और इस बार निशाना बनाया हिन्दुओ की आस्था को.. लेकिन राजस्थान की जनता ने तब भी अपना धेर्य नही खोया.. एक होकर जवाब दिया.. और 'उन्हे' अपने मंसूबो में कामयाब नही होने दिया..

राजस्थान पुलिस ने सभी शहरवासीयो को सुबह सुबह एस एम एस किया की शांति बनाए रखे जल्द से जल्द इस दुस्साहस करने वालो को पकड़ लिया जाएगा.. हमे हमारी सरकार और पुलिस पर पूरा भरोसा है.. ये राजस्थान की अस्मिता पर हमला था और इसे राजस्थान की जनता बर्दस्त नही करेगी... हम एक होकर इनका सामना करेंगे..

जो भी लोग इस हादसे का शिकार हुए है.. मेरी उनके परिवारजनो से पूरण सहानुभूति है.. भगवान उन्हे इतना संबल प्रदान करे की वो इस दुख से जल्द से जल्द उबर पाए..


"जब कुछ इंसान मर जाते है....
तो बहुत ज़्यादा इंसान मारे जाते है.. "

Monday, March 17, 2008

कृपया इसे ना पढ़े

शीर्षक पढ़कर चौकियगा नही, क्योकि यदि इसका शीर्षक भारतीय सभ्यता या संस्क्रती होता तो शायद ही इसे कोई पढ़ता, क्योंकि हमारे यहा लोग विदेशी विषयो को शीग्रता से अपना लेते है, ऐसे लोगो में युवाओ की संख्या अधिक है.. और ये युवा विदेशी त्यौहारो को भारतीय त्यौहार की अपेक्षा अधिक हर्षोल्लास से मानते है.. अभी कुछ दिन पहले की घ्टना है एक निजी विधालय में किसी उत्सव की तैयारिया हो रही थी.. जिसमे विधालय के छात्र उत्साहपूर्वक भाग ले रहे थे.. पूछने पर पता चला की ये टीचर्स डे की तैयारिया थी.. सुन ने में अच्छा लगा की इस दिन सभी छात्र अपने अध्यापक को ऊपहार सहित धन्यवाद देते है.. परंतु इस टीचर डे को मनाने वाले लोग "गुरु पूर्णिमा" को कैसे भूल गये जो की हमारे देश में सदियो से मनाया जाता आ रहा है.. जिस दिन गुरु, अर्थार्त अपने शिक्षक की पूजा की जाती है..एवम उन्हे भगवान का स्थान दिया जाता है.. तो सही मायनो में यह है टीचर्स डे .. पर ना जाने क्यो हमारे देश में इसे भूल कर टीचर्स डे मनाया जाता है.. और गुरु पूर्णिमा वंचित रह जाती है...

सिलसिला यही समाप्त नही होता.. क्योंकि विदेशो में कई त्यौहार है जो भारत में बड़े स्तर पर मनाए जाते है..शुरु करते है वॅलिंटाइन डे से इसे प्रेम का संदेश देने वाला त्योहार भी कहते है.. परंतु हमारे यहा करवा चोथ कई सदियो से मनाया जाता आ रहा है.. जिसमे पत्निया अपने पति की चिर आयु के लिए व्रत रखती है. सही मायनो में यही प्रेम का संदेश देने वाला त्योहार है..

इसी क्रम में चिल्ड्रन्स डे का भी नाम आता है॥ जो की हमारे देश में ख़ासा लोकप्रिय है.. इस दिन बच्चो को टॉफिया खिलोने आदि बाँटे जाते है.. जो की अच्छी बात है.. मगर बाल दिवस मानने वाले लोग बच्छ बारस को कैसे भूल जाते है.. जिस दिन माताए अपने बच्चो के सर पर तिलक लगाकर उनके उज्जवल भविष्य एवं दीर्घ आयु की मंगल कामना करती है.. तो हम इसे चिल्ड्रेन'स डे कहे या फिर उसे जिसका मात्रा नाम चिल्ड्रेन'स डे है..

इतना ही नही इधर कुछ वर्षो से सिस्टर्स डे भी ख़ासा लोकप्रिय हुआ है.. सिस्टर्स डे अर्थार्त बहनो का एक दिन.. बहन का दिन कहने भर से ही यह उनकी गरिमा नही दर्शाता, बहन की गरिमा रक्षा बंधन से होती है.. जिस दिन बहने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है..बहनो के लिए इस से बड़ा सम्मान वाला त्यौहार और कौनसा हो सकता है...

इन उत्सवो के बीच एक पर्व "गुड नेब्र्स डे " भी एक बड़े वर्ग द्वारा मनाया जाता है.. गुड नेब्र्स डे अर्थार्त पड़ोसियो का एक दिन.. जिस दिन पड़ोसियो का धन्यवाद अदा किया जाता है.. परंतु हमारे सुख दुख में साथ देने वाले पड़ोसियो के लिए क्या वर्ष में एक ही दिन, ये कैसी सन्स्क्रति है? हमारे देश में तो प्रत्येक त्योहार या उत्सवो में पड़ोसियो को मिठाइया बाटी जाती है वा उनसे गले मिलकर बधाइया दी जाती है.. अर्थार्त हमारे यहा सभी त्योहारो पर गुड नेब्र्स डे मनाया जाता है..

एक दिन माफी माँगने का.. वर्ष भर यदि हमसे कोई भूल हो जाए तो एक दिन माफी माँगने का भी होता है जिसे सॉरी डे कहा जाता है.. परंतु हम सभी जानते है की जैन समाज में कई वर्षो से क्षमा याचना पर्व मनाया जाता है जिस दिन लोग वर्ष भर की गई ग़लतीओ के लिए क्षमा माँगते है..

इतने उत्सवो में यदि वुमन्स डे का नाम नही ले ऐसा कैसे हो सकता है॥ वुमन्स दे अर्थार्त नारी का एक दिन.. नारी जिसे शक्ति कहा जाता है.. उसके लिए मात्र एक दिन? जबकि हमारे यहा शक्ति का त्यौहार नौ दिन तक नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है.. नवरात्रि में माता की नौ रूपो में अराधना की जाती है.. तो हम पहले ये सोचे की नौ दिन की नवरात्रि मनाई जाए या एक दिन का वुमन्स डे..

मात्रा इतना ही नही भाईयो के लिए भी ब्रदर दे नाम का एक दिवस मनाया जाता है.. इस उत्सव को मानने वाले शायद भाई दूज को भूल जाते है जो हमारे देश में कई सदियो से मनाया जाता आ रहा है..

विश्वा में केवल भारत ही ऐसा देश है जहा सबसे ज़्यादा त्यौहार मनाए जाते है और वे आपसी भाईचारे से सबके साथ मिलकर मनाए जाते है.. इतना ही नही हमारे यहा छोटी से छोटी खुशियो पर भी मिठाइया बाँटी जाती है,कहने का तात्पर्य यह है की इतना उत्सव प्रिय देश होते हुए भी क्या कारण है की पश्चिमी सन्स्क्रति हमारे यहा अपने पाव पसार रही है..

इसका कारण एक ही है की हम जागरूक नही है.. आने वाली पीढ़ी को हमे हमारे त्योहारो से अवगत करना होगा.. हमे छोटी छोटी खुशियो का बाहे फैलाकर स्वागत करना होगा.. सभी भेदभाव भूल कर हमे सभी त्योहारो को परस्पर भाईचारे व सौहार्द से मानना होगा.. तभी हमारा देश भारत एक नये रूप में उभरकर आएगा..